इस वायरस ने कई गरीबों पर ऐसी मार मारी है कि वह ताजिंदगी इसे नहीं भुला सकेंगे। जी हां कोरोना वायरस ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त करने के साथ ही कई लोगों की हंसती खेलती जिंदगी को भी बर्बादी के मंजर तक पहुंचा दिया है। हालांकि उच्च वर्ग के साथ मध्यम वर्ग के लोग जैसे तैसे समय काट रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा उस वर्ग पर मार पड़ी है जो पूरे एक साल के दौरान सिर्फ सीजन के व्यवसाय पर ही अपनी आजीविका चलाता है। इसमें शामिल है मांगलिक कार्यों में ढोल और शहनाई बजाने वाले लोग। देखा जाए तो जब तक कोरोना के चलते शादी विवाह के लिए 50 लोगों की न्यूनतम परमिशन थी,





 उस समय तक यह लोग भी शादी जैसे मांगलिक कार्यों में शामिल हो रहे थे और गाहे-बगाहे इनकी आजीविका चल रही थी। लेकिन हाल ही में शादी के दौरान 11 लोगों की अनिवार्यता ने ढोल और शहनाई वाले हजारों लोगों की आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया है। अब इनके घरों में शहनाई सूखी पड़ी है और ढोल भी बेआवाज होकर ढीले पड़े हैं। राजकाज टीम ने इस पेशे से जुड़े लोगों से बात की तो इनके दर्द का एहसास हुआ। आपको बता दें कि शहनाई को बजाने से पहले उसको पानी में भिगोना पड़ता है और ढोल को भी बजाने से पहले बोल्ट कसना पड़ता है लेकिन अब जब सारी बुकिंग ही रद्द हो गई है तो इन लोगों ने अपनी आजीविका को घर के अलमारी में सजा दिया है और राह तक रहे हैं कि कब यह वायरस समाज से दूर हो और कब शादियों की रौनक लौटे जिससे कि इनकी आजीविका सुचारू हो सके।.



ब्यूरो रिपोर्ट!