झालावाड़ से हरिमोहन चौड़ावत की खबर।
प्रधान संपादक प्रवीण दत्ता की त्वरित टिप्पणी
इन तस्वीरों को देखकर बस मन में एक ही ख्याल आया। इन दोनों ग्रामीण परिवेश के व्यक्तियों को नहीं पता कि दुनिया आज विश्व मातृत्व दिवस मनाती है। लेकिन ये दोनों तो अपना पुत्र धर्म निभा ही रहे थे। ठेले पर पर अपनी जननी के मृत देह को ले जाते हुए इन दोनों के मन में क्या चल रहा होगा
बचपन में भी कितनी बार तू दौड़ी थी उसके पीछे,
और मैं आ जाता था तेरे पीछे,
अपने भाई को तेरी मीठी मार से बचाने।
असल में ये दौड़ना, ये चलना तेरा ही तो सिखाया हुआ है।
पालने में पैर चलाने से लेकर
आज तेरी पार्थिव देह के साथ।
ये मण मण भर के भारी पाँव।
पता नहीं उठते नहीं अब,
शायद इसलिए कि तू भी अब कहाँ दौड़ रही है छोटे भाई के पीछे।
और थोड़ी देर में तेरा हमारे पीछे दौड़ना एक याद बन जाएगी।
बस पीछे रह जायेगा इस दुनिया की चूहा दौड़ में भागना तेजी से,
वैसे ही जैसे तूने सिखाया था मां।
झालावाड मदर्स डे पर झकजोर देने वाली तस्वीर
झालावाड़ में मानवीय संवेदना को हिला देने वाली तस्वीरें आई सामने
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अंतिम संस्कार के लिए ठेले पर ले जाते आए नजर
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झालावाड़ के सुनेल कस्बे का है पूरा मामला
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