देखा जाए तो खबर की हैडलाइन में छपे शब्द वर्तमान दौर में देश के हर निवासी के जेहन में गूंज रहे हैं। एक परिवार में रह रहे दादा, बेटा और पोता। तीन पीढ़ी एक साथ इसी सवाल का जवाब सोच रही है कि अब आगे क्या होगा? और परिवार की ही बात नहीं केंद्र हो या राज्य सरकारें सभी के आकाओं के जहन में अंदरूनी तौर पर यही सवाल कौधं रहा है कि आगे क्या होगा? जी हां, इस महामारी ने अपने सारे तंत्र को अस्त-व्यस्त करते हुए एक तरह से ध्वस्त कर दिया है। केंद्र की बात करें तो सिर्फ मोदी के लिए संकट है। जहां भी कोई कमी की बात हो, मोदी ने यह नहीं किया वह नहीं किया। राज्यों की अगर बात करें तो मुख्यमंत्रियों के लिए संकट है। जहां तक राजस्थान प्रदेश की बात है
अशोक गहलोत ने ये नहीं किया, वो नहीं किया। वास्तविकता यह है चाहे केंद्र हो या राज्य, इस महामारी को देखते हुए अगर राजस्थान प्रदेश की बात की जाए तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई मौकों पर काफी चिंतित नजर आए हैं। उन्होंने कई बार भावुक होकर अपनी मानसिक स्थिति भी जाहिर की है। आपको बता दें कि पिछले एक साल के दौरान लिए गए फैसलों में गहलोत ने भी कई बार लॉकडाउन के लिए अपनी असहमति जाहिर की थी। उन्होंने साफ कहा था कि यदि लॉकडाउन डाउन लगाया गया तो कई गरीब परिवारों के लिए मुश्किल पैदा हो जाएगी। लेकिन इस बार कोरोना के नए म्युटेंट के कारण स्थिति को काबू करने की दिशा में उनको सख्ती करने का फैसला लेना पड़ा।
अब प्रदेश की जनता को भी यह चाहिए कि वह जल्द से जल्द कोरोना गाइडलाइन के सभी नियमों की पालना करते हुए राजस्थान को इस महामारी के संक्रमण से मुक्ति दिलाने की दिशा में अपनी सार्थक भूमिका निभाने का प्रयास करें।
ब्यूरो रिपोर्ट!



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