लगता है इस साल महामारियों ने ठान लिया है कि जनजीवन को अस्त-व्यस्त ही करना है। कोरोना महामारी से हालात सुधरे भी नहीं कि इसी बीच ब्लैक फंगस आया और दिन-ब-दिन बढ़ते मामलों को देख कर बुधवार को ही राज्य सरकार ने इसे महामारी घोषित कर दिया। 



इसी बीच बिहार से एक और खबर आई कि ब्लैक फंगस के बाद अब व्हाइट फंगस के मरीज भी मिले हैं। कैंडीडोसिस नाम का यह वायरस ब्लैक फंगस से भी 4 गुना घातक बताया गया है। व्हाइट फंगस फेफड़ों के अलावा स्किन, नाखून, मुंह के अंदरूनी भाग, अमाशय और आंत सहित किडनी, गुप्तांग और ब्रेन को भी संक्रमित कर देता है। यह नाक और मुंह के जरिए प्रवेश करता है।

 विशेषज्ञों के अनुसार इसकी चपेट में आए मरीजों में कोरोना वायरस टेस्ट जैसे रैपिड एंटीजन, रैपिड एंटीबॉडी और rt-pcr नेगेटिव आए हैं जो कि बहुत ही चिंताजनक बात है। इसके मरीजों की एचआरसीटी जांच में फेफड़ों में कोरोना वायरस जैसे लक्षण मिले थे। बलगम के कल्चर वाइट फंगस का ग्रोथ पाया गया था। जांच होने पर सिर्फ एंटीफंगल दवाओं से यह ठीक हो गए। आपको बता दें कि इस रोग में फेफड़ों का संक्रमण कोरोना जैसा है लेकिन लक्षण कोरोना वायरस के हैं, 



इसका अंतर करना मुश्किल है। यह नवजात शिशुओं में डायपर कैडिसोसिस के रूप में होता है। मुंह में सफेद धब्बे बन जाते हैं। महिलाओं में यह सफेद डिस्चार्ज यानि ल्यूकोरिया का भी प्रमुख कारण होता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस रोग का सबसे ज्यादा कैंसर के मरीजों को खतरा है वही किडनी ट्रांसप्लांट के मरीज भी जिन की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उनको भी अपनी चपेट में ले सकता है। इसके साथ ही आम व्यक्ति में भी जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो, वह इसके आसानी से शिकार बन जाते हैं।


ब्यूरो रिपोर्ट!