ब्यूरो रिपोर्ट। 

राजस्थान हाई कोर्ट के व्ययधीश जस्टिस एसपी शर्मा ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करके इस बात पर जवाब माँगा है कि वह प्राइवेट डॉक्टर्स को कोरोना से मृत्यु होने पर फ्रंट लाइन वर्कर मानते हुए उनके आश्रितों को 50 लाख रुपये का मुआवजा क्यों नहीं दे रही है।  इस संबंध में उर्मिला ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट को बताया कि उसके पति होम्योपैथिक चिकित्सक थे। पिछले साल लॉकडाउन के दौरान उनके पति ने भी कोरोना संक्रमितों का इलाज किया था। जिसके कारण वे भी संक्रमित हो गए। अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां अगस्त में कोरोना संक्रमण के कारण मौत हो गई। 

जब राज्य सरकार ने संविदाकर्मियों, आंगनबाडी कार्यकर्ताओं, अधिस्वीकृत पत्रकारों और राशन डीलर्स को फ्रंट लाईन वर्कस की सूची में शामिल कर कोरोना से मौत होने पर उनके आश्रितों को 5० लाख रुपए का मुआवजा देना तय किया है, तो फिर प्राइवेट डॉक्टर्स को इस सूची में शामिल क्यों नहीं किया गया। जबकि प्राइवेट डॉक्टर्स भी सरकारी चिकित्सकों के समान कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रहे हैं।