प्रतिक्रिया
तो होती है
होगी ही
हर क्रिया की
एक प्रतिक्रिया तो
होती ही है
लेकिन
कई बार क्रिया
उतनी
घातक नहीं होती
जितनी
हो जाती है
प्रतिक्रिया
और इसका कारण
यह है कि
क्रिया तो होती है
तत्काल
हालात व मनस्थिति
के कारण
किन्तु
प्रतिक्रिया
सोची-समझी होती है
यही सोच व समझ
बताती है
हमारे संस्कार
तरबियत
तथा शिक्षा को
मानव सभ्यता का
नुक्सान शायद बुरी
क्रिया ने
उतना नहीं किया है
जितना किया है
आवेशित और असभ्य
प्रतिक्रिया ने !
लोकेश कुमार सिंह
(लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के अपने हैं। Rajkaj.News की इन विचारों से सहमति अनिवार्य नहीं है। किंतु हम अभिव्यक्ति की स्वंत्रता का आदर करते हैं।)


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