कोरोनावायरस अपना विकराल रूप ले चुकी है और यह राष्ट्रीय आपदा बन गई है। इस बारे में हम मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। कोरोना के इंतजाम को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान! कोर्ट ने। यह विचार व्यक्त किए। न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश एल नागेश्वर राव और न्यायाधीश रविंद्र भट्ट की पीठ ने स्वत संज्ञान से दाखिल की गई याचिका के दौरान कहा कि हमारी भूमिका सभी राज्यों के बीच समन्वय बनाने की है और विभिन्न हाईकोर्ट की ओर से अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करने से सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई पाबंदी नहीं लगाई जा रही है।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश रविंद्र भट्ट ने देश में कंपनियों की ओर से वैक्सीन के अलग-अलग दामों के बारे में सवाल किया। उन्होंने कहा कि हमें यह पता चला है कि केंद्र सरकार ने खुद की खरीद के लिए वैक्सीन के अलग दाम किए किए हैं, लेकिन निर्माता अन्य राज्यों को अलग-अलग कीमत में वैक्सीन बेच रहे हैं। सरकार नियामक भी है वह इस ओर कब कारगर कदम उठाएगी? उन्होंने केंद्र से पूछा कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकार ने अभी तक सेना, अर्धसैनिक बल और रेलवे का इस्तेमाल क्यों नहीं किया। सरकार इनका इस्तेमाल कब करेगी? उन्होंने कहा कि सेना सहित अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के संसाधनों का इस्तेमाल क्वारंटाइन करने, टीकाकरण और अस्पतालों के बैड के रूप में किया जा सकता है और इस बारे में केंद्र सरकार के पास अभी तक क्या राष्ट्रीय प्लान है?
उधर सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए 200 पेज के शपथ पत्र में राष्ट्रीय कोविड प्लान के बारे में जानकारी दी गई। इसमें बताया गया कि ऑक्सीजन की आपूर्ति के मसले को सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह देख रहे हैं। केंद्र सरकार इस दिशा में अन्य राज्यों के साथ मिलकर युद्ध स्तर पर काम कर रही है। ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए देश में उपलब्ध तमाम संसाधनों को जुटाने की की हर संभव कोशिश की जा रही है। संक्रमण के हालात को देखते हुए विदेशों से भी मेडिकल संसाधन आयात किए जा रहे हैं। औद्योगिक उत्पादन करने वाली कंपनियों को चिकित्सा ऑक्सीजन उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। इसके साथ ही ऑक्सीजन टैंकरों की संख्या में भी इजाफा किया गया है। कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को करेगी
ब्यूरो रिपोर्ट!


0 टिप्पणियाँ