भारतीय पौराणिक ग्रंथ रामायण के महानायक और देश के जन-जन में बसे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का आज जन्म दिवस है। चेत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन दोपहर को पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राम का जन्म हुआ था। देश के प्रमुख मंदिरों में दोपहर के समय ही जन्मोत्सव की शुरुआत होगी जहां श्रीराम की प्रतिमाओं को पंचामृत से अभिषेक कर उनको नवीन पोशाक धारण कराई जाएगी और फिर उनका आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा। 

आपको बता दें कि देश के जनमानस में राम नाम की महिमा सबसे ज्यादा है। लोग न केवल राम के नाम को अपने नाम में शामिल करते हैं बल्कि उसे गोत्र और जाति के नामों का भी हिस्सा बना  लेते हैं। सुबह की राम-राम, कुशल पूछने के लिए जय राम जी की औऱ सुख-दुख, आश्चर्य आदि मनोभाव की अभिव्यक्ति ही राम से होती है।

जीवन संस्कारों में जन्म से लेकर मुंडन, यज्ञोपवीत और विवाह से लेकर अंतिम संस्कार तक, सब के सूत्र श्रीराम से बंधे हुए हैं। इनसे जुड़े लोकगीतों और प्रथाओं में राम का नाम बार-बार स्मरण किया जाता है। दीपावली हो या होली के उत्सव सभी में राम ही केंद्रित होते हैं।

 श्री राम के साथ देश के जन की स्मृति निर्विकार भाव से बंधी हुई है। पौराणिक मंत्रों में महादेव जी पार्वती से संवाद करते हुए कहते हैं कि राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे, सहस्त्रनाम ततुल्यम श्री राम नाम वरानने। इसका अर्थ यह है कि हे पार्वती, प्रभु श्री राम का एक ही नाम भगवान विष्णु के हजार नाम लेने के बराबर है। इसलिए मैं हमेशा राम नाम में ही लीन रहता हूं।

ब्यूरो रिपोर्ट।