दौसा ब्यूरो रिपोर्ट।
वाकई अब आंसू सिर्फ टीवी रियलिटी शो या फिल्मों के मार्मिक दृश्यों के लिए ही बचे हैं। असल ज़िन्दगी में इंसानियत ना जाने कहाँ चली गई है। इंसानियत और संवेदनशीलता की कमी तो सभी हमेशा महसूस करते हैं पर जब महामारी के दौरान भी कोई हैवान बन जाए और वो भी ऐसा शख्स जो रोज़ाना दर्द और तकलीफ से बाबस्ता होता हो तो फिर दिमाग सुन्न हो जाता है।
दौसा में इंसानियत तब शर्मसार हुई जब धौलपुर का मधुसूदन अपने परिवार के साथ जयपुर से धौलपुर जा रहा था। कादौली के समीप बाईक पर रखे बैंग को चैक करने वह रुक गया। इसी बीच तेज रफ्तार निजी ऐम्बूलैंस समीप खडे बालक पर मौत बन कर टूट पडी। एक पिता अपने बेटे को गोद में उठा कर मदद की गुहार लगाता रहा और उसे मौत की नींद सुलाने वाला एम्बूलैंस चालक बिना किसिस की परवाह किए एन्बूलैंस को दौडा कर चला गया। कुछ देर मदद मिली भी तो तब जब कि बच्चा अपनी मान की की गोद में मौत की नींद सो चुका था।
ये दर्दनाक वाकया आज दौसा के समीप हाईवे 21 पर हुआ। बड़े बड़े वैज्ञानिकों की समझ में कोरोना नहीं आ रहा, यह हम सभ समझ सकते हैं लेकिन बेहिस होकर एक मस्सों की जान ले लेने वाले और फिर मौके से कायर की तरह भाग जाने वाले को कम से कम इंसान नहीं कहा जा सकता। कोरोना से तो देर सबीर इंसान निपट ही लेगा लेकिन हमारे बीच रह रहे इन दरिंदों से कौन बचाएगा।



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दर्दनाक
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