मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से प्रदेश में 18 प्लस के लिए मुफ्त वैक्सीनेशन करने। और? इस पर पड़ने वाले लगभग 3000 करोड रुपए के भार के लिए अन्य मदों में से कटौती करने के निर्णय के बाद राज्य कर्मचारियों में खलबली मच गई है।
कर्मचारियों को यह लग रहा है। कि राज्य सरकार एक बार फिर से कर्मचारियों से जुड़े कुछ अहम फैसले ले सकती है । वित्त विभाग के स्तर पर इस तरह के प्रस्ताव पर मंथन भी चल रहा है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के स्तर पर ही होना है। और इसके लिए जल्द ही मुख्यमंत्री प्रदेश के कर्मचारी संगठनों के साथ वीसी के जरिए संवाद कर सकते हैं। आपको बता दें कि कोरोना के चलते पिछली बार हुए लॉकडाउन के बाद सरकारी राजस्व में भारी कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री गहलोत ने कर्मचारियों की वेतन कटौती और सरेंडर लीव के भुगतान पर रोक लगाने सहित डीए फ्रीज करने जैसे कई कड़े फैसले लिए थे।
कर्मचारी संगठनों ने उस समय इसका काफी विरोध भी किया था और आरोप भी लगाया था कि सरकार ने कर्मचारियों की राय लिए बिना एकतरफा फैसला कर लिया है। हालांकि बाद में सरकार ने कोरोना काल के दौरान रोके गए वेतन भत्तों के भुगतान करने की भी बात कही थी लेकिन भुगतान होता इससे पहले ही दूसरी लहर ने कर्मचारियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। पिछले साल हुई कटौती का भुगतान अब तक नहीं मिल पाया है और लगभग 100 करोड रुपए पीएल सरेंडर के बकाया चल रहे हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट!


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