विश्व में सत्य, अहिंसा, अचौर्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य के पंच सिद्धांतों के जरिए मानव कल्याण का संदेश देने वाले जैन समाज के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की आज जयंती है। जियो और जीने दो का अहम संदेश देने वाले भगवान महावीर ने मनुष्य को जीने की सही दिशा दिखाई थी।

 हालांकि इस बार कोरोना महामारी के चलते जैन धर्म के अनुयायी उनकी जयंती को पूरे उल्लास के साथ नहीं मना पाएंगे, लेकिन उनके सिद्धांतों को जीवन में अमल लाने की प्रतिज्ञा के साथ ही भगवान महावीर को घर-घर में याद किया जाएगा। इस अवसर पर जैन धर्म के गणाचार्य मुनि पुष्पदंत सागर ने कहा कि महावीर को पाना है,

 महावीर को जीना है या समझना है तो अहंकार को छोड़ना जरूरी है। अहंकारी व्यक्ति की दशा घंटा घर पर बैठे उस बंदर के समान है जो घंटाघर की ऊंचाई को ही अपनी ऊंचाई समझ रहा है। महावीर का कहना है कि अहंकार के हिमालय से उतरे बिना व्यक्ति की मुक्ति संभव नहीं। अहंकार आध्यात्मिक कैंसर है और इसका उपचार णमोकार मंत्र का जाप है।

ब्यूरो रिपोर्ट!