प्रवीण दत्ता की कलम से। 

आप अब से थोड़ी देर पहले की तस्वीर देख रहें हैं।  इस तस्वीर का बखान करने के लिए एक लाख शब्द भी कम हैं लेकिन मैं फिर भी प्रयास करूँगा कि कम से कम शब्दों में आपको इस तस्वीर का महत्त्व समझा सकूँ क्योंकि कोविड की महामारी के दौरान यह तस्वीर और इसके पीछे की मंशा राजस्थान के कोविड हालातों की तस्वीर बदल सकती है। 

जैसा कि आप तस्वीर में देख सकतें है लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के दिल्ली आवास पर राज्य के यूडीएच मंत्री और सरकार में नंबर दो का दर्जा रखने वाले शांति धारीवाल बैठे हैं। उनके साथ  डॉ. रघु शर्मा और राज्य के एसीएस सुधांशु पंत बैठे दिखाई दे रहें हैं।  इस तस्वीर में कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला के सिर्फ पैर नज़र आ रहे हैं। 

हनुमान जयंती दिन ये चार हनुमान अपने राम अशोक गहलोत के लिए दिल्ली से रेमडेसिविर दवा और ऑक्सीजन रुपी संजीवनी लाने गए हैं। राम का लक्ष्मण रुपी राज्य अचेत पड़ा है सो हनुमान को संजीवनी लानी ही होगी। अब सवाल यह उठता है कि जो जो लोग गए हैं उनका चयन राम ने किस आधार पर किया?  क्यों उन्हें इस आड़े वक़्त हनुमान का दर्जा दिया ?   

याद दिलाता हूँ आपको कि शांति धारीवाल और ओम बिड़ला दोनों कोटा से ही हैं। अंदरखाने यह हमेशा से कहा जाता है कि हाड़ौती में वैश्य समाज के जन प्रतिनिधियों के पितामह शांती धारीवाल ही रहें हैं फिर बात ओम बिड़ला की विधायकी की समय की हो या फिर प्रमोद जैन भाया को आगे बढ़ाने की।  तो राम ने तय किया कि शांति धारीवाल अपने पुराने संबंधों का लाभ राज्य को दिलाएं और संवैधानिक पद पर बैठे ओम बिड़ला के ज़रिये इस विप्पत्ति के समय मोदी सरकार को थोड़ा सहलाएं।  

रघु शर्मा तो स्वास्थ्य मंत्री होने के लिहाज़ से बाय डिफ़ॉल्ट हनुमान हैं ही इस वक़्त।  

बीडी कल्ला वो मंत्री हैं जिनके विभाग को हर घर पेयजल योजना में केंद्र से खासी मदद मिली है और यह मदद देने वाले और कोई नहीं जोधपुर सांसद और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत थे।  तो बीकानेर के कल्ला हनुमान बनेंगे राज्य के एक नहीं तीन मंत्रियों को साधने में।  शेखावत के अलावा वे बीकानेर के अर्जुन राम मेघवाल और सीमावर्ती सांसद और मंत्री कैलाश चौधरी को भी साधेंगे।  

अब बात असल हनुमान की।  सुधांशु पंत की।  राज्य का यह लायक आईएएस लम्बे अरसे के बाद दिल्ली से राज्य में लौटा है और ख़ास बात यह कि दिल्ली में पंत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में ही कार्यरत थे।  यानि पंत साहब को अपने पुराने विभाग के अफसरों से अपनी ट्यूनिंग का लाभ राज्य को दिलाना है।  

राजकाज की प्रार्थना है कि राम रुपी अशोक गहलोत के ये चार हनुमान अपने काज में सफल हों और संजीवनी लेकर जल्द वापस आएं और अचेत पड़े लक्ष्मण को फिर से भला - चंगा करें।  कोविड काल में हनुमान जयंती के दिन इससे अच्छा और क्या मनोरथ ?