ब्यूरो रिपोर्ट।
गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद के पिता गाजी फकीर का आज सुबह जोधपुर में लम्बी बीमारी के बाद बाद निधन हो गया। गाजी फकीर के निधन से सीमावर्ती जिलों सभी शोक मग्न है। गाजी फकीर के देहांत पर सीएम अशोक गहलोत, पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और सरकार के मंत्रियों-विधायकों तथा कांग्रेस के नेताओं ने शोक व्यक्त किया।
गाज़ी फकीर काफी दिन से बीमार चल रहे थे और कुछ दिन पहले कोमा में भी चले गए थे जिसके बाद उन्हें जोधपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गाजी फकीर के निधन पर मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलात मंत्री साले मोहम्मद के पिता गाजी फकीर के इंतकाल का समाचार जानकर गहरा दुख हुआ है। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से परिवार को दुख सहन करने की कामना की है।
आज दी में गाज़ी फ़क़ीर के पैतृक गांव भागू में उनका पार्थिव शरीर लाया गया और फिर झबरा गांव की दरगाह में गाजी फ़क़ीर की अंतिम यात्रा निकाली गई। कोरोना के चलते अपील के बावजूद उनके अंतिम दर्शन करने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। फ़क़ीर परिवार ने सभी को वहा भी गाइलाइन पालन करने की अपील की सभी ने मास्क पहनकर अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
यह उल्लेखनीय है कि गाजी फकीर का सीमावर्ती जिले जैसलमेर और बाड़मेर में खासा प्रभाव रहा वे इन दोनों जिलों की राजनीति में सीधा दखल रखते थे। गाजी फकीर के कांग्रेस और भाजपा दोनों ही से अच्छे संबंध रहे। बाड़मेर जैसलमेर में रहने वाले सिंधी मुसलमानों में उनकी बहुत मान्यता है।
जैसलमेर-बाड़मेर के साथ ही पाकिस्तान में रहने वाले सिंधी मुसलमानों में गाजी फकीर खासे मक़बूल रहे।मान्यता रही कि गाजी फकीर की अलग से एक अदालत लगती थी जिसमें मुस्लिम समाज के बीच होने वाले विभिन्न प्रकार के मसलों को सुलझाने के लिए वे बाकायदा अपना कोर्ट लगा कर फैसला देते थे। उनके फैसले को समाज के लोगों में मान्यता भी हासिल थी।






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