सवाई माधोपुर से हेमेंद्र शर्मा की रिपोर्ट,
बाघों की अठखेलियों को लेकर विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने वाला रणथंभौर नेशनल पार्क अब न सिर्फ बाघ बल्कि दुर्लभ प्रजाति कहे जाने वाले भालुओं के कारण भी सुर्खियों में है । रणथंभौर में आज कल बाघों के साथ ही भालू भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे है । रणथंभौर में कभी भालुओं की प्रजाति लुप्त होने के कगार पर थी। लेकिन अब भालुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है । जिसे लेकर वन्यजीव प्रेमियों में भी खुशी की लहर है । विशेषज्ञों की माने तो किसी भी वन क्षेत्र की लम्बी आयु वहाँ विचरण करने वाले भालुओं की संख्या पर ही निर्भर करती है । बहुत कम लोग यह जानते है कि भालू जंगल मे पेड़ पौधों के दीमक को खाता है । जिससे वनस्पति को जीवनदान मिलता है । रणथंभौर में बाघों की संख्या में इजाफा होने के साथ ही भालू के दीदार भी पर्यटकों को अधिक होने लगे है ।इन दिनों रणथंभौर के बाहरी जोन 6, 8 ,9 और 10 में पर्यटकों को बाघो की साइटिंग के साथ साथ भालुओं की साइटिंग भी खूब हो रही है । वन्यजीव विशेषज्ञों की माने तो भालुओं की औसत उम्र करीब 29 वर्ष होती है ।भालुओं के नाखून नुकीले होने के कारण बाघ भी भालुओं पर हमला करने से डरते है ।वनाधिकारियों के अनुसार रणथंभौर में पिछले कुछ सालों में ग्रास लैंड काफी विकसित हुवा है । रणथंभौर में ग्रास लेंड विकसित होने से भालुओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है जो वन एंव वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से सुखद खबर है । रणथंभौर में जहाँ साल 2014-15 में भालुओं की संख्या महज 60 से 70 ही थी वही भालुओं की संख्या अब 100 के करीब पहुँच गई है । ऐसे में रणथंभौर भ्रमण पर आने वाले सैलानियों को बाघों के साथ साथ यहाँ भालुओं की भी अच्छी साइटिंग हो रही है ।

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