जयपुर से प्रीति दादूपंथी की खबर

जयपुर। होली के 8 दिन बाद ही शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। शीतला अष्टमी का यह पर्व मुख्यतः राजस्थान में ही मनाया जाता है। इसका कारण है कि राजस्थान को पधारो म्हारे देश वाला प्रदेश भी कहा जाता है  होली के बाद से ही मौसम में परिवर्तन होता है। सूर्य की तेज धूप लोगों को जहां एक और झुलसा देती है वही ठंडा भोजन भी लोगों को प्रिय लगने लगता है। इसीलिए हमारी तीज त्योहारों की संस्कृति में होली के ठीक बाद आता है शीतलाष्टमी त्यौहार!

शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा की जाती है जयपुर के चाकसू स्थित शील की डूंगरी पर एक मेला भरता है जिसे शीतला का लक्खी मेला भी कहा जाता है। हालांकि इस बार कोरोना के चलते यह मेला स्थगित कर दिया गया है। शीतला अष्टमी से एक दिन पूर्व रांधा पुआ होता है। इस दिन हर घर में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।

इन पकवानों में शीतला को मुख्यतः रोटी,राबड़ी,हलवा,पुए पकौड़ी का ठंडा भोग लगाया जाता है। आपको बता दें कि इस त्यौहार के अवसर पर होली के बाद से ही घरों में खाजे, पापड़ी,शक्करपारे और साखियां बनाए जाते हैं।