ब्यूरो रिपोर्ट

जयपुर। राज्य में अब शराब दुकानों का संचालन सरकार खुद करेगी। आबकारी बंदोबस्त की नीलामी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद जो दुकानें बच जाएंगी, उनका संचालन राज्य सरकार के दो निगमों के जरिए किया जाएगा। इसके लिए राजस्थान स्टेट ब्रेवरेज कॉरपोरेशन और राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल को संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। 1 अप्रैल तक दुकानों की ऑनलाइन नीलामी के चार चरण पूरे हो चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद 1 हजार से ज्यादा दुकानें अभी बची हुई हैं। अभी आबकारी विभाग दुकानों की नीलामी के लिए 1 या 2 चरण और कर सकता है। इसके बाद बची हुई दुकानों राज्य सरकार के निगमों के जरिए संचालित की जाएंगी। शुरुआती चरण में राजस्थान स्टेट ब्रेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी आरएसबीसीएल 9 दुकानों का संचालन ही करेगा। हालांकि आरएसबीसीएल भी दुकान संचालन के लिए ठेकेदार तलाश करेगा। इसमें आरएसबीसीएल और शराब ठेकेदार दोनों की हिस्सेदारी होगी। शुरुआती चरण में फीस आरएसबीसीएल भरेगा। इसके बाद 30 जून तक बिजनेस पार्टनर को शुल्क भरना होगा। वार्षिक गारंटी सिस्टम के तहत सभी तरह की फीस बिजनेस पार्टनर को चुकाने होंगे। हालांकि प्रॉफिट मार्जिन में से बड़ा हिस्सा यानी करीब 90 प्रतिशत राशि बिजनेस पार्टनर को ही भरनी होगी। आरएसबीसीएल द्वारा निर्धारित नियम शर्तों के मुताबिक बिजनेस पार्टनर का चयन रिवेन्यू शेयरिंग बेसिस पर किया जाएगा।

बिजनेस पार्टनर का चयन क्षमता और साक्षात्कार के जरिए होगा।

वित्तीय क्षमता के लिए 50 अंक निर्धारित किए जाएंगे।वहीं तकनीकी अनुभव क्षमता के लिए 40 अंक निर्धारित किए हैं।वहीं साक्षात्कार के लिए भी 10 अंक निर्धारित किए हैं। पार्टनर को धरोहर व अग्रिम वार्षिक गारंटी की 50 प्रतिशत राशि दुकान शुरू करने से पहले और 50 प्रतिशत राशि अगले 30 दिन में जमा करानी होगी। कम्पोजिट फीस की बची 50 प्रतिशत राशि 30 जून तक जमा कर सकेंगे। RSBCL के शॉप मैनेजर 3 से 5 दुकानों की मॉनीटरिंग करेंगे

आरएसबीसीएल को पहले फेज में 9 शराब दुकानों का संचालन करना है। इनमें सर्वाधिक 4 दुकानें अकेले उदयपुर जिले में हैं। उदयपुर के खेरवाड़ा, उदयपुर पूर्व, उदयपुर पश्चिम और मावली में शराब दुकानों का संचालन बिजनेस पार्टनर के सहयोग से किया जाएगा। इसके अलावा बीकानेर शहर में 2, बूंदी शहर, चित्तौड़गढ़ और नागौर के लाडनूं में दुकानों का संचालन आरएसबीसीएल के जरिए किया जाएगा। इन दुकानों की वार्षिक गारंटी राशि 90 लाख से लेकर 2 करोड़ 33 लाख रुपए तक रखी गई है। कुलमिलाकर इस नई प्रक्रिया से युवाओं को बिजनेस और रोजगार का अवसर भी मिल सकेगा।