ब्यूरो रिपोर्ट!

तत्कालीन आरपीएस व सहायक पुलिस आयुक्त कैलाश चंद्र बोहरा को आखिरकार प्रक्रिया और कार्यवाही के बाद सेवा से पदच्युत कर दिया है राजभवन की ओर से मंजूरी मिलने के बाद देर रात को कार्मिक विभाग ने इसका आदेश भी जारी कर दिया राज्यपाल कलराज मिश्र ने शुक्रवार को रिश्वत में अस्मत मांगने वाले डीएसपी कैलाश बोहरा की बर्खास्ती को मंजूरी दे दी। इसके बाद देर रात कार्मिक विभाग ने भी डीएसपी बोहरा की बर्खास्तगी के आदेश जारी ​कर दिए। 

विपक्ष ने किए थे सरकार पर तीखे प्रहार

डीएसपी कैलाश बोहरा को बर्खास्त करने की सरकार ने विधान सभा में घोषणा की। लेकिन उसे अनिवार्य सेवानिवृति दे दी गई । लेकिन इसे लेकर विपक्ष के आरोपों  के घेरे में आई सरकार ने गृह विभाग को बोहरा की बर्खास्तगी  के प्रस्ताव कार्मिक विभाग को ​भेजने के निर्देश दिए। 

 सरकार ने कहा कि  बोहरा को अनिवार्य सेवानिवृति के बाद बर्खास्तगी की कार्यवाही शुरू की जा सकती है। 

कैलाश बोहरा को बर्खास्त करने के लिए कार्मिक विभाग ने आदेश जारी किए। जिसमें लिखा गया है कि  बोहरा को संविधान के आर्टिकल 311(2) के तहत कार्यवाही करते हुए सेवा से बर्खास्त किया गया है। इसके लिए कार्मिक विभाग से 30 मार्च को आरपीएससी को फाइल भेजी गई थी। आरपीएससी ने इसे दो दिन पहले अपनी मंजूरी दे दी। इसके बाद राज्यपाल की आज्ञा से बोहरा को बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिए गए। मोहरा के केस को सरकार ने लेयर ऑफ द रेयरेस्ट मानते हुए कार्रवाई की है इसके लिए सीएस निरंजन आर्य की अध्यक्षता में बैठक हुई थी । जिसके बाद पहले तो गृह विभाग की ओर से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई और फिर बाद में डिस्मिबंल यानी पदच्युत या बर्खास्त करने की प्रक्रिया हुई। यह संभवत या ऐसा पहला मामला है कि सिविल सेवा नियमों के तहत आरोपित अधिकारी को पहले निलंबित फिर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देना और फिर बर्खास्त करने की प्रक्रिया पूरी की गई हो। बोहरा को 20 मार्च को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी जिससे पूर्व उन्हें सेवा से निलंबित भी कर दिया गया था।