ब्यूरो रिपोर्ट!
यूं तो उपचुनाव में हार जीत के कई मायने होते हैं और कई बार इसके परिणाम को लेकर ज्यादा समीकरण भी नहीं बनते। लेकिन इस बार उपचुनाव का नजारा ही कुछ और है। गुटबाजी की मार झेल रही कांग्रेस और भाजपा के लिए उपचुनाव के परिणाम या तो संजीवनी साबित होंगे या एक बार फिर से उठापटक का दौर चलेगा। दोनों ही पार्टियों के लिए यह उपचुनाव अपनी अपनी साख का सवाल बन गए हैं। इसी के चलते मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सारा ध्यान उपचुनाव की ओर लगा दिया है। संबंधित क्षेत्रों के सभी नेताओं और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से लगातार मंत्रणा का दौर जारी है। वहीं संवैधानिक पद पर बैठे सीपी जोशी भी पर्दे के पीछे अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसी के साथ क्षेत्रीय नेता होने के नाते चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा और खेल मंत्री अशोक चांदना की भूमिका भी उपचुनाव के परिणाम तय करेंगे।
वहीं दूसरी ओर भाजपा में प्रतिपक्ष नेता की कमान संभाल रहे गुलाब चंद कटारिया और उप नेता राजेंद्र सिंह राठौड़ के साथ राजसमंद की सांसद दिया कुमारी और सुभाष महरिया की साख भी चुनाव परिणाम तय करेंगे। एक और बात जो रोचक होने के साथ-साथ अहम भी है और वो यह है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के प्रदेशाध्यक्ष के लिए यह पहले चुनाव है। चुनाव के नतीजे दोनों ही प्रदेश अध्यक्षों की भूमिका दर्शाए गे और हार जीत का प्रभाव दोनों पर ही पड़ेगा। इस बात में कोई दो राय नहीं।



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