धौलपुर से मुनेश धाकरे की रिपोर्ट। 

कोरोना  दूसरी लहर में मौत तो आम बात हो चली है लेकिन लापरवाही और संवेदनहीनता के चलते मौत ज्यादा तकलीफदेह हो जाती है।  चिकित्सा विभाग के सिस्टम में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। चिकित्सकों की लापरवाही के कारण अधेड़ महिला ने अस्पताल के गेट के सामने ही दम तोड़ दिया, लेकिन चिकित्सकों ने मृतका का उपचार करने की बात तो दूर रही नब्ज देखने तक की जहमत नहीं उठाई। परिजन अस्पताल के सामने ही विलाप करने लगे। मामले की खबर सुनकर एसडीएम एवं सीओ मौके पर पहुंच गए जिन्होंने परिजनों को समझाकर मामले को शांत कराया। चिकित्सा विभाग के खिलाफ परिजनों में भारी आक्रोश एवं गुस्सा देखा गया। मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना बाड़ी राजकीय अस्पताल के सामने है। नत्थो 55 पत्नी राम सिंह कुशवाह की तबीयत खराब होने पर बसेड़ी के आकपुरा गांव निवासी परिजन बाड़ी कस्बे के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने लाए थे।

परिजनों ने बताया एंबुलेंस नहीं मिलने पर महिला को बाइक पर बिठा कर ले कर आ रहे थे, लेकिन रास्ते में पुलिस ने पकड़ लिया। दौ सौ रुपए का जुर्माना लेकर पुलिस ने उनको जैसे-तैसे छोड़ दिया। आनन-फानन में महिला को बाड़ी सरकारी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने महिला की हालत की तरफ नहीं देखा। चिकित्सक ने कोरोना टेस्ट रिपोर्ट कराने के लिए भेज दिया। परिजन जब कोविड टेस्ट कराकर लौटे तो महिला ने अस्पताल के गेट के सामने ही दम तोड़ दिया। परिजन चीख-पुकार करते हुऐ चिकित्सकों को बुलाते रहें, लेकिन महिला की नब्ज देखने तक की जहमत किसी भी चिकित्सक ने नहीं उठाई।

दूर से ही चिकित्सकों ने परिजनों को बोल दिया कि यह मर गई, अब इसे घर ले जाओ, चिकित्सकों द्वारा मृत घोषित किए जाने से परिजनों में कोहराम मच गया। मामले की खबर सुनकर एसडीएम राधेश्याम मीणा और सीओ बाबूलाल मीणा मौके पर पहुंच गए जिन्हें परिजनों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।

दोनों अधिकारियों ने परिजनों से समझाइश कर मामले को शांत कराया। उधर परिजन नवल सिंह कुशवाहा ने बताया 10 दिन पहले ही महिला को वैक्सीन लगवाई थी जिसके बाद उसकी तबीयत खराब हो गई। महिला की तबीयत बिगड़ने पर बसेड़ी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था। आज स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर परिजनों ने बाड़ी सरकारी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों की लापरवाही के चलते महिला की मौत हो गई।