प्रवीण दत्ता की कलम से 


देश में कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं और मद्रास हाईकोर्ट को केंद्र सरकार को यह बताना पड़ रहा रहा है तथा इसके साथ ही मद्रास हाई कोर्ट ने कोरोना संकट के लिए अब 'टच मी नॉट' चुनाव आयोग को जिम्मेदार बताया है। अदालत ने चुनाव आयोग से तल्ख़ टिपण्णी करते हुए कहा है कि जब चुनावी रैली हो रही थी तो आप किसी और ग्रह पर थे क्या? अदालत ने कहा चुनाव आयोग से कहा है कि आपकी संस्था कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव आयोग कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए उचित योजना नहीं बनाई तो 2 मई को मतगणना रोक दी जाएगी।


अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वो हेल्थ सेक्रेटरी के साथ मिलकर मतगणना के दिन के लिए एक प्लान बनाकर 30 अप्रैल तक अदालत के सामने पेश करें। चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी ने चुनाव आयोग से कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का सबसे अधिक महत्व है और यह चिंताजनक है कि संवैधानिक अधिकारियों को ऐसे संबंध में याद दिलाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का आनंद वो तब ही ले सकता है जब वो जीवित रहेगा।मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि स्थिति अब अस्तित्व और सुरक्षा की है। इससे बाद सब कुछ आता है।

उल्लेखनीय है कि देश में हाल ही मैं पांच राज्यों के चुनाव हुए हैं बंगाल में अभी मतदान की प्रक्रिया जारी है। तमिलनाडु में भी एक ही चरण में चुनाव हुए थे इस दौरान बड़ी-बड़ी चुनावी सभा की गयी थी। कई जगहों पर कोविड-19 के नियमों को तोड़ा गया था।

साथ ही आपको ये भी जान लें कि देश में कोरोना के मामले हर दिन बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 3,52,991 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 2,812 लोगों की मौत हुई है। देश में एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 2813658 पहुंच गई है। देश के कई शहरों में हालात बेकाबू हो गये हैं। ऑक्सीजन और दवा के अभाव में लोगों की मौत हो रही है। हाल ही में चुनाव हुए केरल, तमिलनाडु और बंगाल में भी मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हर दिन सैंकड़ों की संख्या में लोगों की मौत हो रही है।

इतिहास साक्षी है अमूमन राज्यों के हाई कोर्ट, संकट के अवस्था में, सुप्रीम कोर्ट की ओर  राह के लिए देखतें हैं हैं लेकिन ऐसा भी एक से अधिक बार रहा है कि किसी राज्य के हाई कोर्ट ने मामले में पहल की हो और बाद में सुप्रीम कोर्ट को उसी राह चलना पड़ा।  मदर्स हाई कोर्ट ने जब न्याय की अलख जगाई है तो अब सुप्रीम कोर्ट को भी देश की जनता का हाहाकार सुनना चाहिए और अब तक जिस जिस ने लापरवाही बरती है उन सभी पर कार्यवाही अमल में लानी चाहिए।  हालांकि ऐसा होगा नहीं।  पर जनता की तरह मीडिया भी तो आदर्शवादी ख्वाब देख ही सकता है सो देख लिया।