वे बाज़ार में मिले , कुछ हड़बड़ाए हुए से थे । मैंने पूछा "अरे शर्मा जी , इतनी जल्दी में कहाँ ?" वे बोले "साहिल जी , एक शोकसभा में पहुँचना है , 4 से 5 का समय था , केवल 10 मिनट बचे हैं 5 बजने में" । मैं चौंका कि कोई मर गया मुहल्ले में और मुझे पता भी नहीं चला । पूछ बैठा "कौन ? किसकी बैठक है ??"
शर्मा जी बोले "बहुत से हैं साहिल जी , जो 800 की दवा 8000 में बेच रहे हैं , जो खाने-पीने की वस्तुओं की कालाबाज़ारी कर रहे हैं" , उन सभी के लिये ही तो यह शोकसभा रखी गयी है जिनकी आत्मा मर चुकी है ।"
मैं बोला "फिर तो मुझे भी चलना चाहिये आपके साथ , 2 मिनट का मौन भी रख लेंगे उनके लिये" ।
©️✍️ लोकेश कुमार सिंह 'साहिल'
(लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के अपने हैं। Rajkaj.News की इन विचारों से सहमति अनिवार्य नहीं है। किंतु हम अभिव्यक्ति की स्वंत्रता का आदर करते हैं।)


1 टिप्पणियाँ
सटीक , आज के परपेक्षय में
जवाब देंहटाएं