जयपुर, संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने बुधवार को विधानसभा में आश्वस्त किया कि सरकार द्वारा किसी भी दल के चुने हुए विधायक, सांसद एवं सदस्यों की कोई फोन टेपिंग नहीं की गई । जिससे किसी भी सदस्य की निजता भंग नहीं हुई। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष का फोन टेपिंग का मुद्दा बेबुनियाद है।
उन्होंने कहा कि नियमानुसार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा नियमित रूप से इंटरसेप्शन संबंधी प्रकरणों की समीक्षा की जाती है। राज्य सरकार ने सख्ती से इन नियमों का अनुसरण किया है । धारीवाल ने कहा कि एसओजी द्वारा 17 जुलाई 2020 को लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को धनबल से गिराने के मुकदमे दर्ज किये। मुकदमे को बाद में एसीबी को स्थानांतरित किया गया।
इस प्रथम सूचना रिपोर्ट में गजेन्द्र सिंह का भी नाम है जो संजय जैन से वार्ता कर सरकार गिराने का षडयंत्र कर रहे हैं, ये गजेंद्र सिंह क्यों नहीं जांच में सहयोग करते हैं, जिससे सच्चाई सामने लाई जा सके। फोन टेपिंग का मुद्दा विपक्ष द्वारा उठाया जा रहा है। उसका मुख्य मन्तव्य सम्भवतया एक केन्द्रीय मंत्री है, जिन्हें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए अथवा प्रधानमंत्री को उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि विजय कुमार राय, पुलिस निरीक्षक वॉइस लॉगर सेक्शन, एसओजी ने उसे प्राप्त सूचना के आधार पर 10 जुलाई 2020 को रिपोर्ट दर्ज कराई । जिसमें उन्होंने बताया कि सरकार गिराने का प्रयास किया जा रहा है ।विधायकों की खरीद फरोख्त कर सरकार के विरुद्ध घृणा की भावना से सरकार को अस्थिर किये जाने के प्रयास किये जा रहे है। धारीवाल ने बताया कि इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 के अन्तर्गत केन्द्र की 9 एजेंसियां एवं राज्य में केवल पुलिस विभाग को टेलीफोन इंटरसेप्शन के लिए अधिकृत किया गया है।


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