चित्तौड़गढ़ काले सोने के रूप में पहचान रखने वाली अफीम की फसल काफी महंगी होती है और किसान इसे बहुत ही सहेज कर उत्पादन करता है.. चित्तौड़गढ़ जिले में इन दिनों किसान अफीम की फसल में डोडे के चीरे लगाने व डोडे से अफीम निकालने में व्यस्त हैं..नियमानुसार अगले वर्ष अफीम लाइसेंस लेने के लिए किसानों को तय मात्रा में अफीम विभाग को जमा करवानी होती है..
तय मात्रा में अफीम व मार्फिन होने पर ही लाइसेंस मिलता है..वहीं गत दिनों चली हवा के कारण कई किसानों के अफीम लाइसेंस कटने का खतरा मंडराने लगा है..किसान चिंतित है कि वे अफीम की पूर्ति कैसे करेंगे..हवा के चलते कई खेतों में अफीम के डोडे जमीन पर गिर गए हैं, जिससे कि उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है..
राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, उदयपुर, कोटा, झालावाड़ आदि जिलों में अफीम की बुवाई होती है..पानी की कमी से किसान पहले ही परेशान हैं और जैसे-तैसे फसल को सहेजने में लगे हैं..वहीं किसान इन दिनों अपने परिवार के साथ अफीम के खेत पर व्यस्त होकर अफीम के डोडे पर चीरा लगा कर अफीम एकत्रित करने में जुटा हुआ है...
चिचित्तौड़गढ़िले में करीब एक सप्ताह पूर्व तीन-चार दिन चली तेज हवाओं के कारण कई किसानों के खेतों में अफीम की फसल आड़ी गिर गई..किसानों को इस हवा के कारण काफी नुकसान का अनुमान है.. चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय के आस-पास के क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस हवा का असर देखने को मिला है.. चित्तौड़गढ़ शहर के निकट स्थित सेंती गांव की बात की जाए तो यहां भी किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है.. अफीम की फसल आड़ी गिर गई है..
और उत्पादन पूरा नहीं मिलने की चिंता है.. जानकारी में सामने आया कि निंबाहेड़ा मार्ग पर सेंती गांव के किसान संजय जैन के खेत में काफी नुकसान हुआ है..यहां पूरा उत्पादन मिल पाने की संभावना नहीं है..सेंती गांव में ही 85 वर्षीय वृद्धा नोजीबाई पत्नी छोगा गुर्जर के नाम पर भी अफीम लाइसेंस है...इसके खेत में करीब 75 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है...
खेत में अधिकांश अफीम के पौधे जमीन पर आड़े गिरे हुए हैं, जिनसे उत्पादन लेना बिल्कुल भी संभव नहीं है.. वहीं जो पौधे जमीन पर गिर गए उन खेतों में अफीम के डोडे सड़ने लगे हैं..नीचे गिरने के कारण इन्हें पूरी हवा नहीं मिल पा रही है...
चित्तौड़गढ़ से गोपाल चतुर्वेदी की खबर




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