जयपुर। राजसमंद चुनाव के बारे में।इस वक़्त सबसे बड़ी अपडेट यह है कि राजपूत नेता भंवर सिंह पलाड़ा, एक।निर्दलीय के रूप में मैदान में उतर सकते हैं। राजपूत समाज ने इस बाबत जबरदस्त दबाव बना रखा है। राजपूत समाज के कई नेता पलाड़ा से मिले हैं। अजमेर, राजसमंद और उदयपुर पलाड़ा का खास प्रभाव माना जाता है।
फिलहाल भंवर सिंह पलाड़ा भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित हैं ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों की मुसीबत बढ़ सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नजदीकी माने जाने वाले भंवर सिंह पलाड़ा की पत्नी कांग्रेस के सहयोग से अजमेर की शहरी सरकार की गद्दी संभाले बैठी हैं। ऐसे में राजे - दिया कुमारी मामले का हिसाब किताब चुकाने के समय अब आ गया लगता है।
साथ ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और राजे की खींचतान में भी राजे का पलड़ा, भंवर सिंह पलाड़ा की वजह से भारी दिख रहा है। अब भाजपा की इस भीतरी लड़ाई को सिर्फ संघ ही शांति से निपटा सकता है।


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