हनुमानगढ. महिला दिवस पर खास खबर
सरकार द्वारा रोडवेज महिला गर्भवती परिचालकों के लिए कुल 6 माह की मैटरनिटी लीव(Leave) तय की हुई है लेकिन अन्य कई विभागों की महिला कर्मचारियों को,6 माह की मैटरनिटी सहित 2 साल की CCL (चाईल्ड केयर लीव) भी मिलती है।जिसके चलते रोडवेज में कार्यरत्त गर्भवती महिला परिचालकों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।ऐसी ही परेशानी है,हनुमानगढ के रोडवेज डिपो में कार्यरत शकुंतला सहारण की
चुनावो में औऱ महिला दिवस जैसे खास दिनों पर आधी आबादी को चौका-चूल्हा छोड़ कामकाजी बनाने की बातें तो बहुत होती हैं,लेकिन जब वह मर्दों के साथ कदम ताल करने लगती हैं तो धरातल पर कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। प्रसव और उसके बाद के गंभीर हालातों में भी उनसे उम्मीद की जाती है कि वह मर्दों की तरह ही दौड़-भाग करें।रोडवेज के हनुमानगढ डिपो में कार्यरत महिलाएं सरकार की इसी दो तरफा सोच का शिकार बन रही हैं।
6 माह की छुट्टी में भी पेच
मेडकिल साइंस के अनुसार आम तौर पर महिला 9 माह तक गर्भवती रहती है। सरकार की तरफ से गर्भवती रोडवेज महिला परिचालकों को कुल 6 माह की मैटरनिटी घोषित की हुई है। अगर कोई रोडवेज परिचालक प्रस्तुता डिलीवरी से 3 माह पूर्व या 3 माह डिलीवरी बाद छुट्टी लेती है,तो 6 माह का गर्भ लेकर बसों में ड्यूटी देनी होगी।और अगर डिलीवरी से 6 माह पहले छुट्टी लेती है,तो बच्चा होने के तुरंत बाद ड्यूटी पर आना पड़ेगा।ऐसे में महिला कर्मचारी दुधमुँहे बच्चे को बसों में ड्यूटी पर साथ लेकर चले या अगर साथ नही लेकर चल सके तो,बिन माँ के मासूम का पालन-पोषण कैसे सँभव हो।कुल मिलाकर ये 6 माह की छुट्टी भी कुछ खास काम नही आती है।राजस्थान रोडवेज के हनुमानगढ डिपो में परिचालक के पद पर कार्यरत शकुंतला सहारण इस समय गर्भावस्था में है।वो कहती है कि बसों में परिचालक की ड्यूटी देना कितना मुश्किल है। चिकित्सक भी ऐसे गर्भवस्था में रेस्ट करने की सलाह देते है,ये सब जानते है।ऐसे में सरकार व विभाग,उन्हें अन्य विभागों की,गर्भवती महिला कर्मचारियों को मिलने वाली 2 वर्ष की चाइल्ड केयर लीव की तरह उन्हें भी CLL देवें।ताकि वे अपने नोनिहलों का पालन-पोषण अच्छे से औऱ समुचित तरीके से कर सके।
बाईट:शकुंतला सहारण,परिचालक,हनुमानगढ डिपू
गौरतलब है कि कोरोना काल मे शकुंतला ने अपने खर्चे मे मेहनत और निडरता से जन-जन को जागरूक करने के अथक प्रयास किये थे,जिसके लिए शकुंतला को विभाग द्वारा सम्मानित भी किया गया था व शकुंतला मीडिया की सुर्खियों में भी रही थी।
एक तरफ सरकारे जच्चा-बच्चा सुरक्षित व स्वस्थ रहे,इसके लिए करोड़ो खर्च कर बहुतेरी योजनाएं चलाती है दूसरी तरफ सरकार की अनदेखी के चलते रोडवेज में कार्यरत महिला परिचालकों को जिस समय मे सबसे सचेत व सावधानी रखने की आवश्यकता होती है।उस गर्भावस्था के नाजुक समय मे भी,बसों के हिचकोलों खाने को औऱ शोर शराबे के बीच वायु प्रदूषण की मार झेलने को मजबूर होना पड़ता है।
हनुमानगढ़ से विश्वास कुमार की खबर...


0 टिप्पणियाँ