जालोर. लगातार माैसम में हाे रहे परिवर्तन व उतार-चढ़ाव के कारण जिले में रबी की फसलों में खराबा हुआ है.. जीरा, गेहूं ईसबगोल व सरसों की फसलों में ज्यादा खराबा है... जीरा व ईसबगोल की उपज में जालोर जिला राज्यभर में पहले स्थान पर रहता है..


लेकिन इस बार मौसम में असंतुलन के कारण फसलों में हुए खराबे से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है.. दूसरी ओर टिड्डीयों के नुकसान के साथ साथ कोरोना के चलते एक बार किसानों की कमर फिर टूट गई है... ऐसे में अब किसान सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे है. दरअसल जीरा व इसबगोल की पैदावार में राजस्थान का  जालोर जिला पहले स्थान पय कहा जाता है.. 

जालोर जिले में अकेले जीरे का उत्पादन 3 लाख हैक्टेयर में होता है इसी प्रकार ईसबगोल का 2.80 हैक्टेयर सरसों का 1.75 हैक्टेयर व गेहूं का 0.90 हैक्टेयर में उत्पादन होता है... लेकिन इस वर्ष मौसम की मार से सबसे ज्यादा खराबा जीरे व ईसबगोल को हुआ है... जो जिले के किसानों की जीवनदायिनी फसल है...जीरे की फसल में किसान 50 से 70 प्रतिशत के करीब खराबा बता रहे हैं... 

इसी प्रकार गेहूं में 15 से 25 प्रतिशत ईसबगोल में 10 से 15 प्रतिशत और सरसो में भी 10 प्रतिशत खराबा बताया जा रहा है... जिले में मौसम के असंतुलन के चलते रबी की फसलों को काफी नुकसान हुआ है... लेकिन काफी समय से मौसम फसलों की आवश्यकता के अनुकूल नहीं रहा जिससे उनमें खराबा हुआ... किसान की जीरे की फसल में 50 से 70 फीसदी तक खराबा हुआ है.. 

किसानों के अनुसार जीरे की फसल को पकने के लिए अभी सर्द मौसम की आवश्यकता थी.. लेकिन मार्च में मई जैसी गर्मी के चलते जीरे की फसल में दाना नहीं बन सका और सबसे ज्यादा नुकसान हुआ....कम पानी वाली जगह पर गेहूं व सरसों को हुआ खासा नुकसान सांचौर, चितलवाना, भीनमाल व रानीवाडा में जल स्तर होने व पानी की मात्रा अधिक होने से गेहू की फसल को कम नुकसान हुआ है...

लेकिन जालोर, सायला, बागोड़ा, आहोर समेत जिले के कई भागों में गेहूं को भी नुकसान पहुंचा है.. इसी के साथ सरसो व ईसबगोल की फसल को भी नुकसान हुआ है.. जिसके चलते किसान प्रदर्शन कर रहे है..ओर अब किसान रबी फसल में हुए खराबे के चलते किसान सरकार से मुआवजे की मांग करने लगे हैं... दो दिन पहले हाडेचा क्षेत्र के किसान पंचायत भवन पर प्रदर्शन कर मुआवजे की मांग कर चुके हैं...

किसानों का कहना है कि मौसम की मार से जीरे की फसल तो चौपट हो गई है... फसलों में 70 फीसदी से ज्यादा खराबा है..वे सर्वे की मांग कर रहे हैं... इसी के साथ पटवारियो की हड़ताल के चलते अभी तक सर्वे नहीं करवाया गया है...  ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कि कब तक पटवारियों की हड़ताल खत्म होती है और कब इस किसानों का सर्वे होगा और कब मुआवजा मिलेगा...

जालोर सुरेश धवल की खबर....