जयपुर नगर निगम हेरिटेज में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र वर्मा के खिलाफ पिछले 6 दिनों से धरने पर बैठे पार्षदों से मिलने बुधवार को कैबिनेट मंत्री महेश जोशी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पार्षदों की समस्या सुनकर कोई बीच का रास्ता निकालने की बात कही।
जिस पर पार्षदों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए सिर्फ और सिर्फ अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र वर्मा के निलंबन की मांग रखी।
इस दौरान महापौर मुनेश गुर्जर ने मंत्री जोशी से कहा कि राजेंद्र वर्मा सही ढंग से काम नहीं कर रहे थे। नगर निगम में भ्रष्टाचार फैला रखा है। वहीं दूसरी ओर वह नगर निगम के पार्षदों को ही झूठे मुकदमे में फंसाने की तैयारी कर रहा है। जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने किसी तरह का भ्रष्टाचार नहीं किया।
बल्कि, गलत तरीके से फाइलों को रोकने और पास करने का काम राजेंद्र वर्मा ने किया है। ऐसे में उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ताकि उनकी असलियत भी जनता के सामने आए और उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। गुर्जर ने कहा कि नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र वर्मा ने आते ही निगम में मनमानी शुरू कर दी।
निगम की बाढ़ नियंत्रण, सुलभ शौचालय और अस्थाई बीट की फाइलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ताकि आम जनता और उच्च अधिकारियों को भी पता लग सके कि आखिर भ्रष्टाचार कहां हुआ है।
वर्मा की कारगुजारी को जांचें अधिकारी: मुनेश
महापौर मुनेश गुर्जर ने कहा कि अगर इन फाइलों में राजेंद्र वर्मा सही साबित होते हैं तो मैं धरना खत्म कर अपने पद से इस्तीफा दे दूंगी। लेकिन अगर वर्मा गलत साबित हुए। तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
मुनेश ने कहा कि राजेंद्र वर्मा अपनी जाति का सहारा लेकर इस भ्रष्टाचार के मुद्दे को दबाना चाहते हैं। जबकि मैं किसी भी व्यक्ति को जातिसूचक शब्द बोल ही नहीं सकती। ना ही हमारा कोई पार्षद इस तरह के शब्दों का प्रयोग करता है।
उस दिन भी जब यह पूरा घटनाक्रम हुआ। वहां सिर्फ राजेंद्र वर्मा नहीं बल्कि नगर निगम के दूसरे अधिकारी भी मौजूद थे।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब राजेंद्र वर्मा की असलियत जनता के सामने आने लगी। तो उन्होंने आम जनता का ध्यान भटकाने के लिए अपनी एसोसिएशन और जाति संप्रदाय को बीच में लाने की कोशिश की है।
इसलिए मैं उच्च अधिकारियों और उनकी जाति के प्रबुद्धजनों से भी अपील करूंगी कि वह एक बार वर्मा की कारगुजारी को भी जांचें।
मुनेश ने कहा कि मैं शुरुआत से ही सभी जातियों को साथ लेकर चल रही हूं। कभी किसी जाति में भेदभाव नहीं करती। यहां तक कि मैंने तो खुद एक एससी वर्ग की बच्ची इशिता जाजोरिया को गोद ले रखा है।
मेरा वाल्मीकि समाज से पुराना रिश्ता है। लेकिन न जाने किन लोगों के दबाव में आकर अतिरिक्त आयुक्त अब मुझ पर जातिसूचक जैसे झूठे मुकदमे करवा रहे हैं। जिससे में डरने वाली नहीं हूँ।
महेश जाेशी ने समझाया
वहीं मंत्री महेश जोशी ने कहा कि मैं आज सरकार के प्रतिनिधि या फिर मंत्री के तौर पर पार्षदों के बीच नहीं आया हूं। बल्कि, मैं आम विधायक के तौर पर इन से मिलने आया हूं। मैंने चारों विधायकों से बात की है।
हम सब चाहते हैं कि पार्षदों का धरना खत्म हो। इसलिए मैं आज पार्षदों से बातचीत करने आया हूं। ताकि बीच का कोई रास्ता निकले और पार्षदों का यह धरना खत्म हो। क्योंकि इस धरने से जयपुर की जनता को परेशान होना पड़ रहा है।


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