जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान में कांग्रेस सरकार की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र वर्मा को निलंबित करने की मांग को लेकर पिछले 46 घंटे से धरने पर बैठे हैं। वहीं, अब मेयर मुनेश गुर्जर का एक वीडियो सामने आया है। इसमें मुनेश गुर्जर नेश गुर्जर नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र वर्मा को लताड़ लगाती नजर आ रही है। वीडियो शुक्रवार का है।
इस वीडियो में मुनेश अतिरिक्त आयुक्त वर्मा से कह रही है आप हमें ज्ञान मत दो। काम करो। हमें ज्ञान नहीं चाहिए। इसके बाद मुनेश कहती है कि या तो इस पर साइन करें या फिर यहां से रवाना हों। इसके बाद महापौर मुनेश अपने कर्मचारियों को राजेंद्र वर्मा के खिलाफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके सचिव कुलदीप राका को पत्र लिखने के लिए कहती हैं।
इसके बाद वहां मौजूद पार्षद 'राजेंद्र वर्मा चोर हैं' के नारे लगाते हुए उनके खिलाफ प्रदर्शन करने लग जाते हैं। इस दौरान वार्ड दो की पार्षद अंजलि कहती है कि राजेंद्र वर्मा ने पैसे खा लिए हैं। इसलिए वह इस फाइल पर साइन नहीं कर रहे। इसके बाद पीछे से आवाज आती है कि इनके तो रोडवेज विभाग में ही खून मुंह गया था। वह आदत अब तक नहीं छूटी है।
वीडियो पर मुनेश गुर्जर ने कहा- नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त ने मेरे साथ बदतमीजी की थी। वह बोल रहे थे कि फाइल पर मैं ही साइन कर दूं। जिस पर मैंने उनसे कहा था आप मुझे मत समझाएं। कुछ लोगों ने आधा अधूरा वीडियो काट कर के पार्षदों के धरने को कमजोर करने की कोशिश की है। जो किसी भी सूरत में कमजोर नहीं होगा। बल्कि, अब हम और ज्यादा पुरजोर तरीके से अतिरिक्त आयुक्त के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद करेंगे।
44 घंटे से धरने पर कांग्रेस पार्षद
इसके घटना के करीब 46 घंटे बाद भी कांग्रेसी पार्षद नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र वर्मा को निलंबित करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। महापौर मुनेश गुर्जर ने कहा- हम अपनी जायज मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। सत्य की नाव डगमग हो सकती है, डूब नहीं सकती। हमें पूरा विश्वास है कि सरकार हमारी मांग को पूरा करेगी।
मुनेश गुर्जर ने कहा- नगर निगम के 50 पार्षदों ने अपना मांग पत्र, इस्तीफा दोनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कुलदीप रांका तक पहुंचा दिए हैं। हमें पूरा विश्वास है कि जल्द ही राजेंद्र वर्मा को उसके किए की सजा मिलेगी। सरकार उसे निलंबित करेगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम नगर निगम के बोर्ड और पार्षद पद को त्याग देंगे। जब पार्षद बनकर ही हम जनता की लड़ाई नहीं लड़ सकेंगे, फिर यह पद और नाम किस काम का है।
वहीं, सिविल लाइंस के कांग्रेसी पार्षदों के धरना छोड़कर जाने पर मुनेश गुर्जर ने कहा- वह भी दिल से हमारे साथ हैं। उन्होंने भी राजेंद्र वर्मा के खिलाफ धरने में हमारे साथ बैठ कर विरोध किया था। किसी कारणवश वह फिलहाल हमारे साथ नहीं हैं। लेकिन, उनका पूरा समर्थन आज भी हमारे साथ है।
नगर निगम के सीनियर पार्षद उमरदराज ने कहा- राजेंद्र वर्मा की लापरवाही से आज जयपुर की जनता परेशान हो रही है। जो अधिकारी जयपुर की प्रथम नागरिक महापौर मुनेश गुर्जर से अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा है। आप कल्पना कीजिए वह जयपुर की जनता से किस तरह का बर्ताव करता होगा। ऐसे में हमें इस तरह का अधिकारी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा। सरकार जब तक राजेंद्र वर्मा को निलंबित नहीं करेगी। हमारा धरना जारी रहेगा। हम आखिरी सांस तक जयपुर की जनता की हक की लड़ाई लड़ेंगे।
कमरे में ही बंधक बनाया
दरअसल, नगर निगम के पार्षदों को उनके इलाकों में पांच अस्थायी कर्मचारी दिए जाते हैं। इसके लिए अतिरिक्त आयुक्त के निर्देशन में गठित टीम टेंडर प्रक्रिया निकालने वाली थी। पार्षदों का आरोप है कि राजेन्द्र वर्मा पिछले 15 दिन से टेंडर नोटशीट पर साइन नहीं कर रहे हैं। जबकि क्षेत्र में मानसून को देखते हुए कर्मचारियों की आवश्यकता है। 15 दिन बाद शुक्रवार को 50 पार्षद महापौर के पास गए और टेंडर नोटशीट पर साइन कराने की बात कही।
इस पर महापौर मुनेश गुर्जर ने अतिरिक्त आयुक्त वर्मा को अपने ऑफिस में बुलाया। जब वह नहीं पहुंचे तो पार्षद शाम 6 बजे अतिरिक्त आयुक्त को जबरन महापौर के कक्ष में ले आए। जहां महापौर और पार्षदों ने अतिरिक्त आयुक्त से फाइल पर साइन करने के लिए कहा।
इसके बाद वर्मा की महापौर और पार्षदों से बहस हो गई। इससे नाराज पार्षदों ने राजेंद्र वर्मा को महापौर कक्ष में बंद कर दिया।
विवाद बढ़ने के बाद शाम करीब 7:15 बजे मंत्री महेश जोशी नगर निगम पहुंचे और दोनों पक्षों को सुना। लेकिन, मामला नहीं सुलझ पाया। महेश जोशी के रवाना होने के कुछ देर बाद अतिरिक्त आयुक्त भी पुलिस की मौजूदगी में भारी विरोध के बावजूद नगर निगम मुख्यालय से निकल गए।
हालांकि इसके बाद भी शुक्रवार रात से अब तक महापौर मुनेश गुर्जर के साथ पार्षद नगर निगम मुख्यालय में ही धरने पर बैठे हैं।
वहीं राजेंद्र वर्मा शनिवार और रविवार के साप्ताहिक अवकाश की वजह से नगर निगम मुख्यालय नहीं आए।


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