जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
नयाpun 2-12 यानी 'नयापन दोबारा' अपनी तरह की पहली प्रदर्शनी रहीं जहां ह्यूमर को क्रिएटिव डिजाइंस द्वारा प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी में सुनने में एक जैसे पर अर्थ में भिन्न हिंदी और अंग्रेजी शब्दों के कुशल प्रयोग से दर्शकों को हंसाने का प्रयास किया गया। शब्दों को जोड़-घटाकर देखने पर उसमें छुपा हास्य और व्यंग उजागर हुआ जिसने लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया।
FOMO की जगह नष्टभयम और LOL की जगह अट्टहास: का हो प्रयोग!
भारत की विरासत और विश्व की सबसे समृद्ध भाषाओं में से एक संस्कृत को किताबों से बाहर निकालकर स्लैंगस के द्वारा प्रदर्शित किया 'यो प्रदर्शनम्॒' ने। इस प्रदर्शनी में आजकल की बोलचाल में प्रयोग होने वाले 20 शब्दों जैसे FOMO,LOL,HEY,WHATSUP आदि के संस्कृत अनुवादो को क्रिएटिव अंदाज में पेश किया गया। इस प्रदर्शनी के संरक्षक अनुराग.एस, फाउंडर पेंसिल बॉक्स डिज़ाइन ने बताया कि कैसे यह प्रदर्शनी भारत की इस भाषा को जीवंत रखने मे मदद करेगी। इस एग्जिबिशन के सफल आयोजन लिए जेईसीआरसी स्कूल ऑफ डिज़ाइन ने 'द पैलेस स्कूल' और 'अन्नत्य स्कूल' से भी पार्टनर किया जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस यूनिक इनिशिएटिव से जुड़ पाए।
अर्पित अग्रवाल, वाइस चेयरपर्सन, जेईसीआरसी ने ऐसी प्रदर्शनियां को जनता के लिए कला और विचारों का उत्प्रेरक बताया वहीं शिवानी कौशिक,डीन, स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन ने इसे कला को प्रदर्शित करने और इसे प्रासंगिक बनाने का अहम मौक़ा बताया है। इस तरह की प्रदर्शनियां छात्रों को थ्योरी से हटकर अपने प्रैक्टिकल नॉलेज का प्रयोग करने में एक अहम भूमिका निभाती हैं और उसके साथ ह्यूमर और संस्कृत का प्रसार करना वाकई एक सराहनीय प्रयास हैं।

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