कोचिंग सिटी कोटा, जो हर साल हजारों डॉक्टर और इंजीनियर तैयार करता है। कोटा में नए सेशन को लेकर तैयारियां की जा रही है। कोटा में अभी एडमिशन उत्सव मनाया जा रहा है। जहां कोचिंगों में आईआईटी और मेडिकल की तैयारी के लिए स्टूडेंट्स एडमिशन के लिए पहुंच रहे हैं। राजस्थान से लेकर देश के कोने कोने से स्टूडेंट्स कोचिंग नगरी में मेडिकल, इंजीनियरिंग व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आने लगे है। भावी इंजीनियर-डॉक्टरों के स्वागत को लेकर शहरवासी भी आतुर है। शहर की कोचिंगों में इन दिनों एडमिशन के लिए कतारें देखने को मिल रही है। इसके चलते कोचिंग क्षेत्र में स्टूडेंटस और पैरेंटस की रौनक देखने को मिल रही है। इस बार पिछले साल का भी रिकोर्ड टूटने जा रहा है जब कोटा में ढ़ाई लाख से ज्यादा स्टूडेंटस पढ़ने के लिए आने वाले है। कोरोना के समय दो साल कोटा के लिए काफी परेशानी भरे रहे, लेकिन पिछले साल जब ऑफलाईन क्लासेज शुरू हुई तो एक साथ दो लाख स्टूडेंटस कोटा में पढ़ने के लिए पहुंचे।
वर्तमान में एडमिशन प्रोसेस शुरू हो चुके है। रोज चार से पांच हजार स्टूडेंटस एडमिशन के लिए कोचिंगों में पहुंच रहे है। सेशन शुरू होने से पहले ही अब तक करीब 80 हजार स्टूडेंटस एडमिशन अलग अलग कोचिंग में ले चुके हैं। नया सेशन पांच अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। इसके बाद जुलाई तक अलग अलग तारीख में सेशन शुरू होंगे। कोचिंग संस्थानों का इस साल कोटा में 3 लाख करीब स्टूडेंट्स आने का अनुमान है। कोचिंगों में एडमिशन के आ रहे स्टूडेंट्स और पेरेंट्स के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
कोटा में कोचिंग संस्थानों में काउंसलिंग और एडमिशन के लिए अलग अलग काउंटर बनाए गए है। जहां बच्चों और उनके पैरेंटस की काउंसलिंग की जा रही है। इसके बाद एडमिशन प्रोसेस करवाया जा रहा है। कोटा के जवाहर नगर, तलवंडी, महावीर नगर, राजीव गांधी नगर, लैंडमार्क एरिया में स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ही नजर आ रहे है। यह इलाके कोचिंग एरिया है जहां ज्यादातर कोचिंग स्टूडेंट्स हॉस्टल और पीजी में रहते हैं।
6 हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार
कोटा में ऑफलाइन कोचिंग से सालाना चार हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार होता है। इस बार बच्चों की संख्या बढ़ने से यह आंकडा 6 हजार करोड़ से ज्यादा पहुंचने वाला है। एक बच्चा कोचिंग में फीस के समेत शहर में करीब साल भर में औसत ढ़ाई लाख रूपए खर्च करता है। इसमें उसका रहना, खाना, घूमना, कपडे़ समेत अन्य खर्चे शामिल है। अलग अलग कोचिंग में अलग अलग कोर्स की अलग अलग फीस है। फीस नब्बे हजार से शुरू होकर एक लाख नब्बे हजार तक है। इसके अलावा एक बच्चे को हॉस्टल में रहने के लिए दस हजार से लेकर अठारह हजार तक के कमरे, तीन से चार हजार रुपए खाने के लिए खर्च होते है। पीजी में कमरे चार से आठ हजार रुपए में मिल जाते हैं। कोचिंग के बच्चों से मैस, लॉन्ड्री, फल, ऑटो रिक्शा, जूस समेत कई छोटे बडे़ व्यवसाय जुड़े हुए हैं।


0 टिप्पणियाँ