जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।  

संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी से जुड़े 953 करोड़ के घोटाले में कानूनी दांव-पेच अब पीड़ितों में फूट तक पहुंच गए हैं। अब तक निवेशकों को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे संजीवनी पीड़ित संघ से अलग नया गुट सामने आया है।

खास यह है कि नए गुट ने संजीवनी सोसायटी पीड़ित समिति गठित की और तीन दिन के भीतर ही सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर सीबीआई जांच के लिए याचिका दाखिल कर दी।

इसमें घोटाला कई राज्यों से जुड़ा होने और अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अनिधियम-2019 (वुड्स एक्ट) में केंद्रीय एजेंसी को जांच करने का प्रावधान होने के आधार पर केस सीबीआई को सौंपने की मांग की है। जबकि 2019 में बना संजीवनी पीड़ित संघ ने एसओजी की जांच पर संतोष जताया है। इस संघ से संजीवनी के 5,479 निवेशक जुड़े हैं।

20 को गठन, 21 को सीएम को ज्ञापन, 22 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका

  • 20 मार्च: जोधपुर में 18 निवेशकों की बैठक हुई, जिसमें 11 सदस्यों की समिति बनी। इनमें 8 राजस्थान व 3 गुजरात के हैं। अध्यक्ष लूणकरण सिंह जोधपुर व उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह अहमदाबाद के हैं।
  • 21 मार्च: समिति ने सीएम के नाम ज्ञापन भेजा। इसमें लिखा- एसओजी ने अभी तक जांच पूरी नहीं की है, न ही निवेशकों को पैसा वापस मिला है। इसलिए जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
  • 23 मार्च: समिति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका पेश की। 10 अप्रैल को जस्टिस एएस बोपन्ना व हिमा कोहली की बेंच में पहली बार और 17 अप्रैल को दूसरी बार सुनवाई हुई। अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।

संदेह है, समिति के पदाधिकारी निवेशक भी हैं या नहीं: पीड़ित संघ
नई समिति निवेशकों को न्याय दिलाने के लिए नहीं बल्कि केस को रफा-दफा करने के लिए बनी है। इसके पदाधिकारी निवेशक भी हैं या नहीं, इसमें भी संदेह है। -शांतिस्वरूप वर्मा, अध्यक्ष, संजीवनी पीड़ित संघ

राज्य सरकार के वकील की दलील- समिति अस्तित्व में नहीं

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी व सिद्धार्थ लूथरा ने पैरवी की। सिंघवी ने कहा कि समिति अस्तित्व में ही नहीं है। इसका कहीं रजिस्ट्रेशन नहीं है। इस पर कोर्ट ने समिति के गठन से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं।

समिति के वकील कृष्णकुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट ने अभी नोटिस जारी नहीं किए हैं। हमारी तरफ से कुछ दस्तावेज देने बाकी हैं। अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।