जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान में चुनावी साल शुरू होने के साथ ही सियासी बदलाव का सिलसिला भी शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर बदलाव के बाद अब आम आदमी पार्टी राजस्थान में नवीन पालीवाल को राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। वहीं राजस्थान में कांग्रेस और बीजेपी का मुकाबला करने के लिए आप ने दिल्ली, पंजाब और गुजरात से 7 विधायकों को राजस्थान का सहप्रभारी बनाया है। जो नवीन पालीवाल और विनय मिश्रा के साथ राजस्थान के 50 जिलों में 200 विधानसभा सीटों पर पार्टी को मजबूत करेंगे।
- 1. अमनदीप सिंह - बलुआना (पंजाब)
- 2. चेतर वसावा - देदियापाड़ा (गुजरात)
- 3. हेमंत खावा - जमजोधपुर (गुजरात)
- 4. नरेश यादव - महरौली (दिल्ली)
- 5. नरिंदर पाल सवाना - फाजिल्का (पंजाब)
- 6. मुकेश अहलावत - सुल्तानपुर माजरा (दिल्ली)
- 7 शिवचरण गोयल - मोती नगर (दिल्ली)
आप के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए नवीन पालीवाल मूलतः कोटा के रहने वाले हैं। जो कार एसेसरीज का व्यवसाय करते हैं। नवीन पालीवाल 2013 में अन्ना आंदोलन से जुड़े थे। इसके बाद लगातार पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। इससे 4 साल पहले नवीन पालीवाल आम आदमी पार्टी में संभाग अध्यक्ष थे। वहीं अब उन्हें पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी है। ऐसे में पार्टी को चुनावी साल में नवीन के सामने कांग्रेस और बीजेपी के साथ ही RLP जैसे संगठनों से मुकाबला करना बड़ी चुनौती होगा।
आम आदमी पार्टी को 4 साल बाद नया प्रदेश अध्यक्ष मिला है। इससे पहले किसान नेता रामपाल जाट आप के प्रदेश अध्यक्ष पद पर काबिज थे। मार्च 2019 में रामपाल जाट आम आदमी पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष थे। वहीं अब आम आदमी पार्टी में अब नवीन पालीवाल के रूप में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की है। इससे पहले पार्टी के प्रदेश सचिव देवेंद्र शास्त्री ने संगठनात्मक जिम्मेदारी भी संभाल रखी थी। हालांकि पिछले कुछ समय पहले पार्टी की तमाम कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया था। बता दें कि आम आदमी पार्टी का राजस्थान में लंबे वक्त से कोई संगठन नहीं था। पिछले दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि जल्द ही राजस्थान में पार्टी का नया संगठन खड़ा किया जाएगा। केजरीवाल के इस बयान के बाद पार्टी ने प्रदेशाध्यक्ष घोषित कर दिया है। अब माना जा रहा है कि जल्द ही कार्यकारिणी का भी गठन किया जाएगा। ताकि चुनावी साल में पूरी ताकत के साथ आप के नेता विधानसभा तक पहुंच पाए।


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