हनुमानगढ ब्यूरो रिपोर्ट।
जो मनुष्य गौसेवा में नहीं लगा हो वह भले ही कितना भी बड़ा, कितना भी धनवान हो यदि वह गौभक्त नहीं है तो वह सौभाग्यशाली नहीं हो सकता। यह बात गुरुवार को श्री प्रबल जी महाराज की कुटिया में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठे दिवस कथाव्यास पूज्य समर्थ श्री त्रयंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज ने कही। आज के समय में वस्तु महत्वपूर्ण बन गई है। वो मूर्ख है जो वस्तु के लालच में पारिवारिक संबंध बिगाड़ लेता है।
इस दौरान कथाव्यास पूज्य समर्थ श्री त्रयंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, सकटासुर, माखन चोरी, पूतना वध, गौचारण लीला व कंस वध के प्रसंग सुनाए। वहीं, काशी की दिव्य आरती व भगवान यज्ञ नारायण की परिक्रमा करके श्रद्धालुओं ने अपने जीवन को सफल बनाया। देर शाम को भजन संध्या का आयोजन हुआ जिसमें श्रद्धालुगण ईश्वर की आराधना में लीन हो गए। इससे पहले तरूण तपस्वी डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य जी महाराज ने 44 वर्ष बाद यज्ञ सम्राट श्री प्रबल जी महाराज की पावन धरा पर हो रहे 100 कुंडीय श्री पंचदेव महायज्ञ के सफल आयोजन पर सहयोगियों व इलाकावासियों को शुभाशीष दी।
महायज्ञ की पूर्णाहुति व भंडारा आज
सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा व 100 कुंडीय श्री पंचदेव महायज्ञ का समापन शुक्रवार को होगा। आयोजन समिति के सदस्य मांगीलाल महिपाल ने बताया कि सातवें दिवस को सर्वप्रथम 111 यजमानों द्धारा नित्य पूजन किया जाएगा। इसके बाद 1100 कन्याओं, 108 बटुकों तथा 108 सौभाग्यवती माताओं का पूजन किया जाएगा। आखिरी दिवस भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा सहित विभिन्न प्रसंगों के साथ श्रीमद भागवत कथा के इस दिव्य आयोजन की पूर्णाहुति होगी। शाम 6 बजे काशी विश्वनाथ की तर्ज पर हो रही महाआरती का भी विश्राम होगा। साथ ही शाम 7 बजे से लाखों भक्तगणों के लिए विशाला भंडारा होगा। इसी बीच 11 दिवसीय कार्यक्रम के सफल आयोजन पर विशिष्ठ सहयोगियों व समस्त कमेटियों के कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया जाएगा।
सवा लाख पार्थिवेश्वर महादेव का रुद्धाभिषेक कल
महाशिवरात्रि महोत्सव के तहत 18 फरवरी को धर्मसंघ संस्कृत महाविद्यालय एवं आयुर्वेद रसायनशाला परिसर में सुबह सात बजे से मिटटी के सवा लाख शिवलिंग बनाए जाएंगे। इसके बाद समस्त भक्तों के द्धारा शास्त्रीय व वैदिक परम्परा से महाशिवरात्रि की वेला पर रात्रि के चारों प्रहर के अलग-अलग अभिषेक व पूजन अलग-अलग पदार्थों से किया जाएगा। इसमें लाखों की संख्या में भक्तगण भगवान भोलेनाथ का अर्चन करके पुण्य अर्जन करेंगे।

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