जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट। 
पिंकसिटी प्रेस एनक्‍लेव, नायला पत्रकार योजना में 571 आवंटी पत्रकारों को साल 2013 में वरिष्‍ठ पत्रकार और ईमानदार अधिकारियों की राज्‍य स्‍तरीय कमेटी ने सभी पात्रताओं की जांच कर योग्‍य माना था तो कमेटी के कार्य पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। कमेटी में सदस्‍य सचिव के नाते डीआईपीआर निदेशक डॉ. लोकनाथ सोनी पात्रता की चयन प्रक्रिया में शामिल थे और उन्‍होंने आवंटियों के चयन में राज्‍य अधिस्‍वीकरण नियम 1995 की पालना भी कराई थी। अब हाई कोर्ट के निर्णय की आड़ में नियम 1995 की पालना की बात कहकर आवंटियों के पट्टे रोकना गलत है।  
चलो नायला संगठन के आह्वान पर शनिवार को 25वे दिन मुख्‍यमंत्री से मिलने उनके निवास पर पहुंचे जत्‍थे में शामिल महिला पत्रकारों ने सवालों कर सीएमआर के अधिकारियों को 571 आवंटियों की पीड़ा जाहिर की और उन्‍हें मुख्‍यमंत्री जी से ही मिलाने की मांग की। चलो नायला संगठन के 22वे जत्‍थे की महिला पत्रकार रिचा शुक्‍ला, मधु जैमिनी, मोनिका शर्मा, स्‍नेहलता दाधीच और मीना शर्मा ने 8 अक्‍टूबर, 2012 को गठित राज्‍य स्‍तरीय पत्रकार आवास समिति की सूची भी सीएमआर के अधिकारियों को सौंपी। उन्‍होंने बताया कि नायला योजना के सम्‍बन्‍ध में उच्‍च न्‍यायालय के निर्णय में भी नियम 1995 की पालना को कहा गया है। नियम 1995 तय करना डीआईपीआर का काम है और विभाग के तत्‍कालीन प्रमुख शासन सचिव राजीव स्‍वरूप और निदेशक डा. लोकनाथ सोनी ने नियम 1995 के अनुसार पांच वर्ष की सक्रिय पत्रकारिता का अनुभव देखने के बाद ही 571 आवंटियों को पात्र माना था। 
यूडीएच के तत्‍कालीन प्रमुख शासन सचिव जीएस संधु, मुख्‍यमंत्री के तत्‍कालीन प्रेस सलाहकार एम. यासीन, वरिष्‍ठ पत्रकार नारायण बारेठ, सन्‍नी सबेस्टियन, भुवनेश जैन, ओम गौड़, महेश शर्मा, अनिल माथुर, राजेश शर्मा, विशाल शर्मा, राजीव जैन, श्‍याम सुंदर तंवर, किशोर शर्मा, नीरज मेहरा की कमेटी ने सभी आवेदकों की पात्रता की जांच कर 571 को आवंटन योग्‍य घोषित किया था, जिस पर तत्‍कालीन जेडीसी कुलदीप रांका ने भूखंड आवंटित किए थे। पिंकसिटी प्रेस एनक्‍लेव, नायला के सम्‍बन्‍ध में न्‍यायालय ने अपने पहले व दूसरे निर्णय में प्रासंगिक तथ्‍यों और नियम कायदों की पृष्‍ठभूमि में कानून के अनुसार 15 दिन में कार्यवाही करने को कहा था तो 10 साल में भी यह कार्यवाही क्‍यों नहीं हो पाई है। पत्रकारों ने बताया कि योजना के खिलाफ साजिश के तहत न्‍यायालय के निर्णय को ठीक से समझा ही नहीं गया है जबकि न्‍यायालय ने योग्‍य आवंटियों को प्‍लॉट का कब्‍जा देने से कभी नहीं रोका है। चूंकि मामले की तथ्‍यात्‍मक रिपोर्ट अब मुख्‍यमंत्री जी के पास है तो वे ही आवंटियों का दुख दर्द दूर करेंगे। 
आवंटियों की सुनवाई कर रहे संयुक्‍त सचिव ललित कुमार ने कहा कि पीडि़तों को यूडीएच सचिव कुंजीलाल मीणा से मिलना चाहिए। पत्रकारों ने उन्‍हें बताया कि इस सम्‍बन्‍ध में वे मीणा से भी मिल चुके हैं। पहले तो मीणा नायला योजना की भूमि को ही इकॉलोजिकल जोन कहकर खारिज कर रहे थे। मीणा तो मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत के पिछले कार्यकाल में राज्‍य स्‍तरीय आवास समिति के किए गए 571 के चयन पर ही सवाल उठाते हैं। जबकि वे खुद वर्ष 2012 तक डीआईपीआर आयुक्‍त रहते नायला योजना की प्रक्रिया का हिस्‍सा रह चुके हैं। प्रदेश भर में पत्रकार आवास योजनाओं के लिए सरकार के 20 अक्‍टूबर 2010 के आदेश में दी गई पात्रताओं और बाद में जारी शिथिलताओं पर तब तो उन्‍होंने स्‍वीकृति दी थी, लेकिन अब इनकार क्‍यों कर रहे हैं। अब अगर सीएमआर के अधिकारी कह रहे हैं तो मीणा से भी पत्रकार एक बार फिर मिल लेंगे। महिला पत्रकारों ने मुख्‍यमंत्री के नाम ज्ञापन और अपने भूखंड के आवंटन दस्‍तावेज भी अधिकारियों को सौंपे। आवंटी पत्रकारों ने बताया कि मुख्‍यमंत्री से मिलने तक आवंटी पत्रकारों को रोजाना सीएमआर जाकर दस्‍तावेज और ज्ञापन देने का क्रम जारी रहेगा।