जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
10 साल से आवंटन के बावजूद प्लॉट के पट्टों के लिए भटक रहे पिंकसिटी प्रेस एनक्लेव, नायला के 571 आवंटी पत्रकारों के साथ न्याय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही कर सकते हैं। विषय की गंभीरता का उन्हें ध्यान है। जेडीए की भेजी तथ्यात्मक रिपोर्ट भी उनके कार्यालय में रखी है तो अन्य अधिकारियों से मिलने का कोई औचित्य ही नहीं है। मुख्यमंत्री से मिलने उनके निवास पर पहुंचे पत्रकारों को जब सीएमआर के अधिकारियों ने सुझाव दिया कि आवंटी पत्रकार अपने पट्टों के लिए यूडीएच उच्चाधिकारियों से मिल लें तो पत्रकारों ने पूरी वस्तुस्थिति उन्हें समझा दी। चलो नायला संगठन के आह्वान पर मुख्यमंत्री निवास पर पहुंचे 21वे जत्थे में वरिष्ठ पत्रकार सुभाष चौधरी, हरी सिंह चौहान, मनोहर लाल शर्मा, गौरी शंकर शर्मा और मनोज पारीक ने संयुक्त सचिव ललित कुमार को स्पष्ट किया कि 571 पत्रकारों की समस्याओं का हल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ही पास है। इसलिए उन्हें जल्दी मिलने का समय दिलाया जाए। पत्रकारों के आवंटन दस्तावेज देखकर और पीड़ा सुनकर संयुक्त सचिव ललित कुमार ने भी हमदर्दी दिखाई और यूडीएच उच्चाधियारियों से मिल लेने की सलाह दी। इस अवसर पर जत्थे के साथ गए सहयोगी पत्रकार शीशराम खासपुरिया और अमन वर्मा ने भी आवंटियों के साथ 10 साल से जारी अन्याय की कहानी अधिकारियों को सुनाई। पत्रकारों ने जब सीएमआर अधिकारियों को ये कहा कि आज उनका 24वा जत्था मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचा है तो संयुक्त सचिव ने टोकते हुए कहा कि रोज आ रहे जत्थों की उन्हें पूरी जानकारी है और आज पत्रकारों का 24वा नहीं, बल्कि 21वा जत्था ही आया है। इस पर पत्रकारों ने कहा कि गांधी सर्किल पर किए प्रदर्शन और रविवार को हुई दूरभाष पर सीएमआर में वार्ता को भी वे अपनी उपस्थिति ही मानते हैं। पत्रकारों ने निवेदन करते हुए कहा कि पीड़ितों की संख्या 571 है और दिनों के हिसाब से तो वे 114 दिनों तक रोज 5-5 के जत्थों के रूप में सीएमआर में हाजिर हो सकते हैं। जरूरत पड़ी तो न्याय के लिए अपने परिवार के साथ पूरे 571 भी सीएमआर आ जाएंगे। आप या मुख्यमंत्री एक बार आदेश कर दें। संगठन के प्रतिनिधियों ने बताया कि शनिवार को एक बार फिर महिला पत्रकारों का जत्था सीएमआर पहुंचेगा और सीएम गहलोत जी या श्रीमती गहलोत जी को अपनी पीड़ा बताने का प्रयास किया जाएगा।

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