जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
जयपुर विकास प्राधिकरण की वेबसाइट पर सारी दुनिया ये देख सकती है कि जेडीए के जोन 13 की योजनाओं में पिंकसिटी प्रेस एनक्‍लेव, ए, बी और सी अप्रूव्ड और तीन साफ सुथरी योजनाएं हैं, जिनमें 571 आवंटी पत्रकार अपने अपने प्‍लॉट के मालिक है। योजना के सभी 571 प्‍लॉटों की सर्विस आईडी और जमा राशि का विवरण भी वेबसाइट पर उपलब्‍ध है, लेकिन इससे बड़ा धोखा क्‍या होगा कि बिना किसी दोष के 571 आवंटियों को साढ़े नौ साल बाद भी प्‍लॉटों के कब्‍जे नहीं दिए जा रहे हैं। 

(5 वर्ष पूर्व विपक्ष में बैठे अशोक गहलोत ने धरने पर बैठे पत्रकारों से प्लॉट देने का वादा किया था)

पूरा राजनीतिक खेल मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत के ड्रीम प्रोजेक्‍ट पिंकसिटी प्रेस एनक्‍लेव, नायला योजना को रोकने के लिए खेला गया। अब अशोक गहलोत की सरकार होने के बावजूद तत्‍कालीन गलतियों को सुधारा नहीं जा सका है और 571 निर्दोष आवंटी परिवार न्‍याय की आस में दर दर भटक रहे हैं। करीब चार माह से तो आवंटी मुख्‍यमंत्री के दरबार पर भी दस्‍तक दे रहे हैं, लेकिन उनके दरबारी अधिकारी मिलने भी नहीं दे रहे हैं। यूं तो मुख्‍यमंत्री गहलोत को मीडिया फ्रेंडली कहा जाता है, लेकिन 16 दिन से लगातार जत्‍थे बनाकर उनसे मिलने घर जा रहे 571 पत्रकार आवंटी परिवारों से मिलने तक का समय नहीं दे रहे हैं। 
मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत की सदा से सोच रही है कि वंचितों, असहायों, पीडि़तों को न्‍याय मिले। गहलोत की ऐसी ही योजनाएं उनके शासन को देश भर में अव्‍वल बनाती हैं। पहले भी साल 2002 में गहलोत के राज में जयपुर के धौलाई ग्राम में पत्रकार कॉलोनी बसाई गई थी। इसके बाद उनकी अगली सरकार में नायला में साल 2010 में पिंकसिटी प्रेस एनक्‍लेव बसाई गई। गहलोत की इस सरकार में भी प्रदेश भर में पत्रकार आवास योजनाएं लाने की तैयारी की जा रही है। 
मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत, उनकी सरकार और उनकी कांग्रेस पार्टी राजस्‍थान में अपने चार साल के शासन की उपलब्धियों के कसीदे कढ़ने में लगे हैं। प्रदेश में बहुत से काम बहुत अच्‍छे हुए हैं, जिनसे प्रदेश के नागरिकों का जीवन भी सुधरा है। बहुत से काम होने बाकी भी हैं। इन सबके बीच 571 निर्दोष आवंटी पत्रकार और उनके परिवार बिना किसी दोष के पिछले साढ़े नौ साल से दर-दर पर भटक रहे हैं और न्‍याय के इंतजार में हैं। स्‍वयं मुख्‍यमंत्री गहलोत पिछले दो माह मे तीन बार कह चुके हैं कि 571 परिवारों के साथ न्‍याय करेंगे, लेकिन 571 परिवारों का दुख कम नहीं हो पाया है। 
जयपुर के नायला में मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत की पिछले शासन के दौरान साल 2010 से 2013 के बीच बसाई गई पत्रकार आवास की ये योजना 2014 के बाद राजनीतिक द्वेषता की शिकार बन गई। दुख और आश्‍चर्य होता है ये जानकर कि तत्‍कालीन अधिकारियों की लापरवाही और जान बूझकर की गई गलतियों के शिकार ये 571 परिवार बिना किसी दोष के खामियाजा भुगत रहे हैं। न तो उन्‍हें आवंटित प्‍लॉट के पट्टे दिए जा रहे हैं न ही कोई उचित जवाब ही दिया जा रहा है। जबकि दस्‍तावेजों के अनुसार सभी 571 आवंटी अपने प्‍लॉट के स्‍वामी हैं। दुखद ये भी है कि राज्‍यपाल महोदय की आज्ञा से गठित एक संवैधानिक कमेटी द्वारा राज्य सरकार की निर्धारित सभी पात्रताओं की जांच के बाद चयनित 571 आवंटी पत्रकार साढ़े 9 साल से शेष राशि जमा कराने और अपने भूखंड के पट्टे के लिए दर-दर पर भटक रहे हैं। 
नियम कायदे तक पर, अधिकारियों का झूठ भी उजागर
इन निर्दोष आवंटी पत्रकारों के दुख की कहानी भी बड़ी रोचक है, जिसमें सभी ने जमकर राजनीतिक गोटियां खेली हैं। साल 2010 में मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत के ड्रीम प्रोजेक्‍ट के रूप में शुरू हुई पिंकसिटी प्रेस एनक्लेव, नायला में जयपुर के पत्रकारों को आवासीय भूखंड देने के लिए आवेदन लिए गए थे। राज्य स्तरीय आवास कमेटी ने राज्‍य सरकार के बनाए पात्रता के मानदंडों पर खरे 571 पत्रकारों की छंटनी की और भूखंडों की लॉटरी निकाली गई और सभी से प्रथम किस्‍त की राशि जमा कर ली गई। 
जेडीए को लॉटरी के बाद 30 दिवस में 571 आवंटियों को शेष राशि के डिमांड नोट जारी कर कब्‍जा पत्र सौंपने थे, लेकिन सभी नियमों की अवहेलना कर इस कार्यवाही को लंबित कर दी गई। इस बीच किसी ने आवंटियों की पात्रता को न्‍यायालय में चुनौती दे दी, जिससे योजना की प्रक्रिया में ठहराव आ गया। इसी समय राज्‍य में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। न्‍यायालय का निर्णय आने के बाद जब आगे की कार्यवाही की जाती तो प्रदेश में मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ही बदल गई। सभी पात्र आवंटियों को भूखंड देने के न्यायालय के आदेश के बावजूद तत्‍कालीन सरकार के अधिकारियों ने अनेक भ्रामक अड़ंगे योजना के बीच खड़े कर दिए। सबसे बड़ा अडंगा योजना को इकॉलोजिकल जोन में बताकर ठंडे बस्‍ते में डाल दिया गया। तीन माह पहले जब 571 आवंटी एकत्र होकर जेडीए पहुंच गए और मामले की पड़ताल की तो इकॉलोजिकल जोन का झूठ उजागर हो गया और सभी के समझ भी आ गया कि उनकी कोई गलती या दोष नहीं है। 571 पत्रकार आवंटियों के तीन माह चले आंदोलन के बाद सभी प्‍लॉट फिर से आवंटन योग्‍य हो गए हैं और सरकार के निर्देश के लिए विस्‍तृत तथ्‍यात्‍मक रिपोर्ट भी भेज दी गई है, लेकिन या तो उच्‍चाधिकारी इस पर कुंडली मारे बैठै हैं या फिर मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत इसे भूल गए हैं। 
साल 2023 और गहलोत सरकार का पांचवां साल भी आ गया है। मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा है कि प्रदेश के आवास से वंचित पत्रकारों को भी आवास मिले। अब तो इन 571 परिवारो के साथ न्‍याय होना चाहिए, क्‍योंकि इससे प्‍लॉट के स्‍वामी होने के बावजूद कब्‍जे से वंचित परिवारों का तो भला होगा ही, साथ ही अगली पीढ़ी के पत्रकारों के लिए नई आवास योजना का मार्ग भी इसी से प्रशस्‍त हो सकेगा। जब तक साढ़े नौ साल से अटकी योजना और इसके निर्दोष आवंटी पत्रकारों के साथ न्‍याय नहीं होगा, तब तक सरकार के सुशासन के दावे भी बेमानी ही माने जाएंगे। 
बहुत हुआ इंतजार, अब होगा कलम से वार
विगत 4 माह से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे 571 पत्रकारों को फिलहाल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भरोसा है। गहलोत भी 3 बार 571 पत्रकारों के प्रतिनिधियों से मिलकर आश्वस्त कर चुके हैं कि जल्दी ही उनका काम कर रहे हैं। जेडीए ने भी सभी तथ्यों की रिपोर्ट सरकार को भेज रखी है और सरकार के निर्देश के इंतजार में हैं। कुछ राजनीतिक घोंचेबाज योजना को रोकने की कोशिश में घोंचा भी कर रहे हैं। वहीं 571 पत्रकार भी अपने हक के लिए पूर्णतया सजग है और अपने जायज हक के लिए हर स्तर पर लड़ने को तैयार हैं। 571 पत्रकार परिवार तो नायला में योजना स्थल पर अपने अपने प्लॉट पर अपने नाम की तख्तियां भी गाड़ आए हैं। संघर्षरत 571 पत्रकारों में अनेक नामचीन और दिग्गज पत्रकार भी शामिल हैं। सभी प्रमुख संस्थानों के अनेक वरिष्ठ पत्रकार अपने हक के इंतजार में हैं। 
देखने लायक होगा कि मुख्यमंत्री गहलोत योजना को हरी झंडी दिखाएंगे या 571 पत्रकार अपने जायज हक के लिए अपनी कलम का वार करेंगे। चलो नायला संगठन के तले स्वयं के अखबार और न्यूज चैनल चलाने वाले 200 से अधिक आवंटी तो खबर के जरिए व्यवस्था से मोर्चा लेने के लिए कलम कस चुके हैं।