जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
हाईकोर्ट ने अवमानना के एक मामले का निस्तारण करते हुए गवाही के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता को थप्पड़ मारने वाले एक पुलिस कॉन्स्टेबल पर 25 हजार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि बगैर किसी शर्त के कोर्ट में पेश उसके माफीनामा को स्वीकार कर लिया।भीलवाड़ा जिले के गुलाबपुरा के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज की कोर्ट में वर्ष 2018 में यह घटनाक्रम हुआ था। उनकी तरफ से ही अवमानना का मामला हाईकोर्ट में पेश किया गया था।गुलाबपुरा के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज की ओर से पेश की गई याचिका के अनुसार बचाव पक्ष के अधिवक्ता पुलिस कॉन्स्टेबल रमेश कुमार से सवाल पूछ रहे थे। सवाल पूछे जाने के दौरान रमेश कुमार उत्तेजित हो गया और उसने अधिवक्ता को थप्पड़ मार दी। इस कारण गवाह के बयान नहीं हो पाए और सुनवाई स्थगित करनी पड़ गई। कोर्ट की अवमानना करने वाले रमेश कुमार ने अपना बचाव करते हुए लिखित में अपना जवाब पेश किया। उसका कहना था कि बचाव पक्ष का वकील उस पर अपने अनुसार बयान देने के लिए दबाव बना रहा था। अधिवक्ता ने अपने अधिकार का फायदा उठाते हुए मेरे पांव पर लात मारी। इससे मेरे पांव में जोरदार दर्द हुआ और इसकी प्रतिक्रिया में मैने धीरे से उसे थप्पड़ मार दी। अवमानना के इस मामले में रमेश कुमार ने दो बार कोर्ट से अपील की उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 228 (न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पब्लिक सर्वेंट का अपमान करना) को ड्रॉप किया जाए। हालांकि बाद में उसकी तरफ से कहा गया कि वह बगैर किसी शर्त के माफी मांगने को तैयार है। ऐसे में उसके खिलाफ यह मामला ड्रॉप कर दिया जाए। खंडपीठ ने कहा कि यह तो स्पष्ट है कि अवमानना के इस मामले में पुलिस कॉन्सेटबल ने स्वीकार किया है कि उसने अधिवक्ता को थप्पड़ मारा। हालांकि उसने अपने एक्ट को यह कहते हुए सही ठहराने का प्रयास किया कि अधिवक्ता ने पहले उसके पांव पर मारा। खंडपीठ ने उसके माफीनामे को स्वीकार करने के साथ कहा कि घटना के समय उसकी सात साल की ही सेवा हुई थी। वह पहली बार किसी गवाह के रूप में कोर्ट में पेश हुआ था। इसके साथ ही खंडपीठ ने रमेश कुमार को आदेश दिया कि वह एक माह के भीतर भीलवाड़ा की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पास ₹ 25 हजार जमा करवा दे। इसके साथ ही खंडपीठ ने अवमानना से जुड़े इस मामले का निस्तारण कर दिया।