फ्लू एक ऐसी बीमारी है जिससे बचना संभव नहीं है, हर व्यक्ति कभी न कभी इस से पीड़ित होता ही है । पिछले कई दशकों से तरह तरह के फ्लू फैलने लगे हैं क्योंकि मनुष्य का आवागमन तेजी से पूरे देश, संसार में बढ़ गया है। वैश्विक महामारी कोविड के बाद तो हर मनुष्य वायरल फ्लू से उतना ही डरने लगा है जितना कि हार्ट अटैक से। यह विचार शैली मेरे अनुभव से सही नहीं है। हर वायरल बुखार मृत्यु का कारण नहीं होती है और हमें वायरस और बैक्टीरिया के साथ जीवन जीने के तरीके सीखने और समझने पड़ेंगे। मुद्रास्फीति के चलते अस्पताल का इलाज सामान्य नागरिक की क्षमता के बाहर हो जायेगा और आपकी कमाई का कोई तीस प्रतिशत हिस्सा आपको बीमा के प्रीमियम में देना पड़ सकता है। ऐसे में हमें रोगों से बचाव के उपायों को जानना और उन पर अमल करना सीखना होगा।
आप जब भी बैंक या कोई अन्य ऑफिस में जाओ तो अपना पेन जरूर साथ लेकर जाओ।
सार्वजनिक स्थानों पर जाते समय दरवाजा खोलने के लिए एक अतिरिक्त रुमाल रखो।
हाथ मिलाने की बजाय अब नमस्ते करने की आदत डालो।
अपना एक सामाजिक दायरा बनाओ। दस पंद्रह दोस्तों से मिलो ताकि थोड़े संक्रमण से रोग
प्रतिरोधक क्षमता जाग्रत रहे।
शोधकर्ताओं के अनुसार बौद्धिक विचार विमर्श रक्षात्मक श्वेत रक्त कणिकाओं की संख्या
में वृद्धि करते हैं ।
यह भी पाया गया है कि द्वेष, हिंसा, लालच, भेदभाव, घृणा जैसे मनोविकार रखने वाले लोगों
में नेचुरल किलर सेल्स यानि प्राकृतिक घातक कोशिकाएं की कमी हो जाती है। ये कोशिकाएं
कीटाणुओं को तेजी से मार कर शरीर की रक्षा करती हैं।
जो लोग रोग को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हैं और अपने शरीर की
रोग प्रतिरोधक क्षमता के भरोसे रहते हैं इनका इम्यूनिटी तंत्र अति सक्रिय हो कर उनकी
रक्षा करता है। भयावह कोविड के दौर में भी कुछ चिकित्सक बिना मास्क के कार्यरत रहे
हैं और प्राकृतिक इम्यूनिटी से लाभान्वित हुए हैं।
समय समय पर शरीर को आराम देने के लिए मालिश करवाते रहना चाहिए।
हाथ और पैरों की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
एक थका हुआ, उनिंदा शरीर वायरस के सामने नहीं टिक पाएगा। नींद का आनंद लेना सीखिए।
आपके पद और धन से ज्यादा बहुमूल्य रात की गहरी नींद होती है।
संतुलित, हल्का और पौष्टिक आहार लीजिए। जीवन की आवश्यकताओं में अन्न को सर्वोच्च स्थान
दीजिए।
भीड़ को भगवान आज तक नहीं मिला है और ना ही इससे शादियां सफल हुई हैं। वायरस भीड़ से
फैलते हैं। वक्त आ गया है कि भीड़ ना तो बनाएं और ना ही बनाने दें।


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