हमारे शरीर में कुछ बीमारियां यकायक उभर आती हैं जिनका हमें अंदेशा भी नहीं होता है। कैंसर नामक बीमारियों का समूह भी हमारे शरीर में कुछ विशिष्ट परिवर्तनों के फलस्वरूप किसी भी अंग में प्रकट हो सकता है। कितनी ही सावधानियों और उपायों के बावजूद कैंसर को शतप्रतिशत नहीं रोका जा सकता है पर फिर भी कुछ विशिष्ट जीवनशैली से  इसकी संभावनाओं को कम किया जा सकता है। किसी भी शरीर में कैंसर क्यों होता है इस बात का कुछ प्रकार के कैंसर रोगों के अलावा हमें पूर्ण जानकारी नहीं है परंतु आनुवांशिकता, वायरस, तंबाकू आदि के प्रभावों को तो अक्सर देखा जाता है।

     इस भयभीत करने वाली बीमारी को रोकने के बारे में हर समय कोई न कोई शोध चलता रहता है। हाल ही में स्विट्जरलैंड में हुए शोध से आशाओं में एक बार फिर से हलचल हुई है। इस अध्ययन के अनुसार यदि शरीर में विटामिन डी एवम् ओमेगा थ्री की पूर्ति पर्याप्त मात्रा में बनी रहे और सामान्य घरेलू कसरतों को नियमित रूप से जारी रखा जाए तो किसी व्यक्ति के कैंसर होने की संभावनाओं को कोई 60 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। विटामिन डी प्राकृतिक रूप में अंडे के योल्क, दूध, दही, पनीर, संतरा, सोया दूध व टोफू के अलावा वसायुक्त मछलियों जैसे सालमन, सार्डिन, मैकरेल, टूना आदि मछलियों में पाया जाता है। व्यक्ति धूप में बैठ कर अपने शरीर द्वारा भी विटामिन डी बना सकता है बस उसे सूरज उगने की तीन घंटे बाद कोई 45 मिनट तक कम कपड़े पहने धूप में बैठना पड़ेगा। इसके अलावा विटामिन डी सप्लीमेंट भी काफी उपयोगी होता है। ओमेगा 3 विभिन्न मछलियों, ताजा पीसे हुए अलसी के बीज, चिया बीज, अखरोट और सोयाबीन में प्रचुरता से पाए जाते हैं।

     इस अध्ययन में पाया गया कि विटामिन डी, ओमेगा और नियमित घरेलू सामान्य कसरतों में से यदि एक के बारे में भी लापरवाही बरती जाए तो बाकी दो अन्य से कोई लाभ नहीं होता है। तीनों की सामूहिक ताकत ही हमारी कैंसर को रोकने की संभावनाओं को बढ़ाती है।