जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान आवासन मण्डल अपनी विभिन्न आवासीय योजनाओं में इस वर्ष 50 हजार हरे-भरे पौधे लगाएगा। आवासन आयुक्त पवन अरोडा ने प्रदेश में विभिन्न आवासीय योजनाओं तथा निर्माणाधीन प्रोजेक्टों में सघन पौधारोपण करने के निर्देश मण्डल अभियन्ताओं को दिये हैं। उन्होंने कहा है कि मानसून को देखते हुए पार्कों, सडक के किनारों, सांस्थानिक क्षेत्रों सहित अन्य खाली चिन्हित स्थानों पर अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएं। अरोडा बोर्ड कक्ष में पौधरोपण प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वाटिका, निवाई, बड़ली (जोधपुर), शिवबाडी (बीकानेर), मानपुर आबूरोड़, भींडर, खोढा गणेश (किशनगढ) सहित मण्डल की अन्य नवविकसित योजनाओं को भी हरा-भरा बनाया जाए। आवासन आयुक्त ने निर्देश दिये कि प्रताप नगर में 8 हजार, मानसरोवर, इंदिरा गांधी नगर तथा इंदिरा गांधी नगर विस्तार में 5-5 हजार, निवाई तथा शिवबाडी में 3-3 हजार, उदयपुर में ढाई हजार, अलवर तथा भिवाडी में 2 हजार सहित धौलपुर, नायला, आबू रोड, नागौर, फलौदी, कुडी भगतासनी, बाडमेर आदि योजनाओं में कुल 50 हजार पौधे तथा लगभग 1 लाख शर्ब्स एवं लताएं (बोगनबेलिया, टीकोमा, चांदनी, लेंटाना, फायकस आदि) लगाए जाएं। अरोडा ने कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी सार-संभाल की व्यवस्था की जाए और इस काम में सामाजिक, स्वयंसेवी, शिक्षण संस्थाओं सहित आमजन का पूरा सहयोग लें।

श्याम पार्क-सिटी पार्क की थीम पर होगा पौधारोपण।
आवासन आयुक्त ने कहा कि मानसरोवर में विकसित किये जा रहे सिटी पार्क में श्माय पार्क-सिटी पार्क की थीम पर आमजन के सहयोग से 5 हजार पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्क में सजावटी पौधों के साथ विभिन्न किस्मों के छायादार, फलदार-फूलदार पेड-पौधे लगाए जाएं। आरएचबी ग्रीन एप के माध्यम से स्वयंसेवी संस्थाओं, पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों के सहयोेग से यहां इस माह के अन्त में पौधारोपण अभियान की शुरूआत की जाएगी।अरोडा ने कहा कि सेंट्रल पार्क से भी बडा यह पार्क 52 एकड़ में बन रहा है। इसमें 75 फीसदी ग्रीन एरिया है। यहां जॉगिंग ट्रेक, वॉकिंग ट्रेक, वाटर बॉडीज, बॉटनीकल गार्डन, एंट्रेंस प्लाजा, फूड कोर्ट, पार्किंग सहित कई सुविधाएं विकसित की जा रही है।आवासन आयुक्त ने इस दौरान गत वर्ष के पौधरोपण अभियान की भी समीक्षा की। वरिष्ठ उद्यानविद् दिलीप शर्मा ने बताया कि वर्ष 2021-22 में 38 हजार पौधे लगाए गए। इसके साथ ही बोगनबेलिया, टीकोमा, लेंटाना, जेट्रोफा, कनेर, इनर्मी, सिसलपिनिया आदि प्रजातियो के 50 हजार फुलवारी के पौधों का भी रोपण किया गया है।