अलवर ब्यूरो रिपोर्ट।
राज्यसभा चुनाव से पहले उदयपुर में कांग्रेस की बाड़ेबंदी मय शिविर चल रहा है। इसमें बसपा के विधायक नही पहुंचे। कुछ विधायक इस मौके को अवसर में बदलना चाहते हैं। इस दौरान कुछ की नाराजगी बाहर आई है। बसपा से कांग्रेस मे शामिल हुए विधायक व सैनिक कल्याण और पंचायती राज मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने कहा कि राज्यसभा में प्रदेश से स्थानीय नेता होना चाहिए। जिससे प्रदेश का मजबूत प्रतिनिधित्व हो सके।संदीप यादव के निवास पर बसपा के 4 विधायकों का आना गुरुवार को चर्चा का विषय बना रहा। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बनी रही कि आगामी 10 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में रायशुमारी करने के लिए ही पांचों विधायक एकत्रित हुए हैं। क्योंकि आगामी राज्यसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस की बाड़ाबंदी में पांचों विधायकों में से कोई भी शामिल नहीं हुआ है। तिजारा विधायक की ताई के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए बसपा से कांग्रेस में आए विधायक राजेंद्र गुड्डा, जोगेन्द्र अवाना, गिर्राज सिंह मलिंगा, वाजिब अली, लाखन मीणा गुरुवार को थड़ा गांव पहुंचे। इस दौरान गुढ़ा ने कहा कि गहलोत सरकार पर दो बार आए संकट में उन्होंने ही ढाल बनकर उनको बचाया था। बसपा के 6 विधायकों ने ही कांग्रेस की सरकार को गिरने से बचाया था और आने वाली 10 तारीख को राज्यसभा सदस्य के चुनाव में भी बसपा के विधायक की निर्णायक होंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा से किसी भी प्रकार का उनका संपर्क नहीं हुआ है। राज्य सरकार कमजोर पड़ चुकी है। सही निर्णय नहीं लिए जा रहे हैं। राज्यसभा सांसद प्रत्याशी राजस्थान का ही होना चाहिए था। अभी तक राज्यसभा और लोकसभा में एक भी माइनॉरिटी का सांसद सदस्य नहीं है। इस पर भी मुख्यमंत्री को विचार करना चाहिए। कांग्रेस शिविर में नहीं जाने को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि कोई नाराजगी नहीं है। वो अपने काम में लगे हुए हैं। अभी वो सरिस्का में टाइगर देखने के लिए आए हैं। उसके बाद आगे का सोचा जाएगा। तिजारा विधायक संदीप यादव ने कहा कि बसपा के सभी विधायक एक परिवार की तरह रहते हैं और सभी निर्णय मिलकर एक साथ करते हैं। राज्यसभा सदस्य चुनाव में भी पांचों विधायक एक जगह ही वोट डालेंगे। सभी विधायकों में कुछ नाराजगी है। उस पर भी मंथन किया जा रहा है। बता दें कि गुढ़ा को हाल ही में सैनिक कल्याण और पंचायती राज का राज्य मंत्री बनाया गया, तो वही जोगेंदर अबाना को देवनारायण बोर्ड की कमान मिली है। दीपचन्द खैरिया को राजस्थान किसान आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है। वाजिब अली और संदीप यादव नाराज हैं क्योंकि उनको सत्ता में कोई भी पद नहीं मिला है। बाकी विधायक कुछ भी बोलने से बचते हुए नजर आए।