जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान मे मुख्य सचिव के नाम सोशल मीडिया पर फेक एकाउंट बनाकर साइबर ठंगो द्वारा रूपये मांगने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पैसों की डिमांड से सचिवालय में हड़कंप मच गया। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ठग की तलाश मे जुट गई है। दरअसल साइबर ठग द्वारा मुख्य सचिव उषा शर्मा के नाम का फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर पैसे मांगे गए। हालांकि, गनीमत यह रही कि किसी भी कर्मचारी ने पैसे ट्रांसफर नहीं किए, लेकिन सीएस की फोटो वाले नंबर से आए इस मैसेज ने हड़कंप मचा दिया। साइबर ठगों ने मुख्य सचिव की फोटो लगाकर अननोन नंबर से सचिवालय के कई विभागों के कर्मचारियों-अधिकारियों को मैसेज किया। जिसमें की शुरुआत तो पहले हालचाल जानने की गई, उसके बाद जैसे किसी कर्मचारी ने मैसेज का रिप्लाई किया तो उसके बाद दूसरा मैसेज आता है। उसमें यह कहा जाता है कि उन्हें कुछ पैसे की जरूरत है, तो क्या वह उनकी पैसे को लेकर मदद कर सकते हैं। अचानक से आए इस मैसेज से सचिवालय कर्मचारियों में हड़कंप मच गय। पहले तो कर्मचारी इस संकोच में रहे कि इसका क्या रिप्लाई दें। लेकिन जैसे ही उन्हें यह समझ में आया कि यह फर्जी मैसेज भी हो सकता है तो उन्होंने तत्काल इसकी पुलिस से शिकायत की।

मुख्यसचिव ने दिए साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराने के आदेश।

मुख्य सचिव के नाम से सचिवालय कर्मचारियों से पैसे मांगने का मामला जब सीएस के पास पहुंचा तो उन्होंने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से साइबर थाने में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव उषा शर्मा ने इस तरह के मैसेज का रिप्लाई करने के लिए मना किया है। सचिवालय कर्मचारी योगिता विश्नोई ने कहा कि पहले तो मुख्य सचिव की फोटो लगी नंबर से मैसेज आया तो वह भी आश्चर्यचकित रह गईं। पहले मैसेज में तो उन्होंने उनसे उनकी लोकेशन के बारे में पूछा, जिसे रिप्लाई किया। उसके बाद उन्होंने दूसरे मैसेज में अपनी कुछ नीड का जिक्र किया, लेकिन उन्हें इस पर संदेह हुआ और इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों को की। बाद में पता लगा कि यह फर्जी अकाउंट नंबर से मैसेज आया था। आपको बता दें कि 5 अप्रैल को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रमुख सचिव आईएएस कुलदीप रांका के साथ भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जिसमें साइबर ठगों ने रांका की तस्वीर का गलत इस्तेमाल करते हुए व्हाट्सएप प्रोफाइल पर फोटो लगाई और फिर आईएएस कुलदीप रांका के ओएसडी फोन कर जयपुर से बाहर होने का हवाले देकर रुपयों की मांग की। शक होने पर पड़ताल की तो नंबर किसी अन्य व्यक्ति का पाया गया, जबकि फोटो आईएएस कुलदीप रांका की लगी हुई थी।