जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजधानी जयपुर मे सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ दायर रिवीजन अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसमें दूर बैठकर जादू करने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने कहा कि परिवादी अधिवक्ता आशीष सैनी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसने अपनी मानसिक स्थिति के संबंध में किसी चिकित्सक से उपचार नहीं करवा कर इस स्थिति के लिए अशोक गहलोत को जिम्मेदार बताते हुए परिवाद पेश किया है। पूर्व में शहर की निचली अदालत ने भी परिवाद खारिज कर दिया था, जिसे रिविजन अर्जी दायर कर चुनौती दी गई थी। रिवीजन अर्जी में कहा गया कि अशोक गहलोत ने अपने पिता से जादूगरी सीखी थी। अब अशोक गहलोत दूर बैठे उस पर अपनी जादूगरी चला रहे हैं, जिसके चलते परिवादी कभी हकलाकर बोलता है, कभी नाक में बोलता है तो कभी तुतलाकर बोलने लगता है और कभी-कभी गूंगा बन जाता है। यह सब अशोक गहलोत के जादू-टोने का प्रभाव है। इसके अलावा परिवादी एक बार पार्क में घूम रहा था। इतने में पीछे से किसी व्यक्ति ने आकर उसके पीठ पर मारा और कांग्रेस लिखी गाड़ी में बैठकर भाग गया। इधर निचली अदालत ने उसकी बातों को काल्पनिक बताकर खारिज कर दिया। रिवीजन अर्जी में कहा गया कि निचली अदालत ने अशोक गहलोत का नाम पढ़कर ही परिवाद खारिज कर दिया। ऐसे में निगरानी स्वीकार कर अशोक गहलोत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। जिसे अदालत ने खारिज करते हुए कहा कि परिवादी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और इसके लिए वह अशोक गहलोत को जिम्मेदार मान रहा है।

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