मनीष व्यास-जैसलमेर।
राज्य पक्षी गोडावण का दुनिया का पहला स्मारक जैसलमेर में बन रहा है। देगराय मंदिर के पास इसे एक मादा गोडावण की याद में बनाया जा रहा है, जहां इस मादा गोडावण की मूर्ति भी स्थापित की जाएगी। यह मूर्ति बनकर तैयार भी हो चुकी है, जिसे जल्द ही यहां लगाया जाएगा। जैसलमेर के ग्रामीण इलाकों के चरवाहों और पर्यावरण प्रेमियों ने ये अनूठी पहल की है और जन सहयोग से राज्य पक्षी गोडावण का स्मारक बनाने का बीड़ा उठाया है।
मादा गोडावण की मूर्ति बनकर तैयार मादा गोडावण की साल 2020 में हाइटेंशन लाइनों से टकराकर मौत हो गई थी। उसी मादा गोडावण की याद में और पशु I-पक्षियों के प्रति अपने प्रेम को दर्शाने के साथ-साथ सभी को इस दुर्लभ पक्षी के धीरे-धीरे लुप्त होने के कारणों पर गौर करवाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने ये बीड़ा उठाया है। इस स्मारक पर लगने वाली मादा गोडावण की मूर्ति बनकर तैयार भी है। बहुत जल्द इस स्मारक के बनने के बाद इस मूर्ति को यहां लगाया जाएगा।
चरवाहों का गोडावण से विशेष प्रेम
पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि ये अपनी तरह का दुनिया का पहला गोडावण का स्मारक होगा। यहां के चरवाहे इन पक्षियों से विशेष प्रेम रखते हैं। जन सहयोग से इस स्मारक को बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि साल 2020 में देगराय ओरण इलाके में एक मादा गोडावण की मौत बिजली की हाइटेंशन लाइनों से टकराकर हो गई थी। पहले से ही लुप्त हो रहे इस पक्षी की मौत से बहुत दुख से हुआ था।
दुर्लभ गोडावण का संरक्षण बहुत जरूरी
इसके बाद फैसला किया गया था कि इस मादा गोडावण का स्मारक बनाएंगे, ताकि लोगों को और प्रशासन को बता सके कि ये दुर्लभ पक्षी है और इसका संरक्षण करना अति आवश्यक है। पेशे से पशुपालक भाटी गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जब भी किसी दुर्घटना के बारे में जानकारी मिलती है, तो ये तुरंत तैयार हो जाते हैं उसको बचाने के लिए। इस बार वे मादा पक्षी का स्मारक बनाकर वन्य जीव के प्रति चरवाहों और ग्रामीणों के प्रेम को दर्शा कर एक अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं।

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