जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
स्वायत्त शासन नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री शांती कुमार धारीवाल ने कहा कि सभी संकल्प महत्वपूर्ण है। भू-जल संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा नीति बनी हुई है। आज भी बिल्डिंग बॉयलॉज में प्रावधान है कि निर्माण पर दो पेड़ लगाएं। तीन सौ वर्ग मीटर के भूखण्ड में निर्माण करने पर वॉटर हार्वेस्टिंग का पूरा प्रोजेक्ट लगाना आवश्यक है। लेकिन बहुत ही कम लोग लगाते है। उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को एक साथ मिलकर भू-जल संरक्षण के लिए प्रयास करने होंगे। हम सभी को प्रण लेना होगा कि अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए मौके पर खड़े होकर कार्य करायें। धारीवाल ने राजस्थान विधानसभा में गैर सरकारी कार्य दिवस में सदस्य राजेंद्र राठौड़ द्वारा प्रस्तुत गैर सरकारी संकल्प पर विचार रखे। इस संकल्प पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि सभी विधायक और सांसद अपने-अपने क्षेत्रों की ग्राम सभाओं में उपस्थित होकर भू-जल संरक्षण के कार्यों की पालना करायें। इस दौरान शिक्षा मंत्री डॉ. बी.डी.कल्ला एवं जल स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री महेश जोशी ने भी जल संरक्षण के लिए मिल-जुलकर प्रयास करने के लिए कहा। इससे पहले सदस्य अशोक लाहोटी ने स्वच्छता के संबंध में जागरूक किये जाने और प्रदेश के स्कूलों में स्वच्छता को पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल करने के लिए संकल्प पेश किया। इसके बाद सदस्य राजेंद्र राठौड़ ने प्रदेश में सतही जल की कमी व भू-जल के अंधाधुंध दोहन से भू-जल के निरंतर गिरते स्तर से होने वाले संकट से बचाव के लिए भू-जल दोहन पर नियंत्रण व जन संरक्षण के लिए आवश्यक व प्रभावी कदम उठाने के लिए संकल्प प्रस्तुत किया। राजस्थानी भाषा को प्रदेश में द्वितीय राजभाषा का दर्जा देने के लिए सदस्य बिहारीलाल द्वारा प्रस्तुत संकल्प पर बोलते हुए शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने कहा कि इस संबंध में 25 अगस्त 2003 को राजस्थान विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं होने से कष्ट है। इसके लिए सर्वसम्मति से केन्द्र सरकार से आग्रह करें। उन्होंने लेखकों, साहित्यकारों एवं कवियों की रचनाओं का जिक्र करते हुए राजस्थानी भाषा की समृद्धता का उल्लेख किया।