जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
रअजस्थान भी अब उन राज्यों मरण शामिल हो जाएगा जो अपना कृषि बजट अलग से पेश करते हैं। राजस्थान सरकार इस बार विधानसभा में अलग से कृषि बजट लेकर आएगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसके लिए 23 फरवरी की तिथि मुकर्रर कर दी है। 23 फरवरी को ही आम बजट पेश होगा। कृषि बजट से किस तरह की रहेंगी किसानों और पशुपालकों की उम्मीदें, वहीं पिछली बजट घोषणाओं में कितनी हो सकी है प्रगति यह बात अब देखने लायक होगी।

किसानों के कर्ज का 10 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करते हुए कर्जमाफी की दे सकती है सौगात।
23 फरवरी को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जब आम बजट पेश करेंगे तो इसके साथ ही पहला कृषि बजट भी पेश किया जाएगा। पिछले साल बजट भाषण में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अलग से कृषि बजट पेश करने की घोषणा की थी। जो इस बार पूरी होने जा रही है। कृषि बजट से किसानों और पशुपालकों को बड़ी उम्मीदें रहेंगी। माना जा रहा है कि पहली बार आ रहे कृषि बजट में किसानों से जुड़ी कुछ बड़ी घोषणाएं शामिल होंगी। गहलोत सरकार का किसानों पर खास फोकस रहा है। कृषि बजट में सबसे बड़ा मुद्दा किसान कर्जमाफी का रह सकता है। राज्य सरकार किसानों के सहकारी बैंकों के सभी तरह के कर्ज माफ कर चुकी है, लेकिन कमर्शियल बैंकों से लिया हुआ किसानों का कर्ज माफ नहीं हो सका है। बड़ी बात यह भी है कि कमर्शियल बैंकों का कर्ज नहीं चुका पाने के चलते कुछ समय पूर्व दौसा, जयपुर और अलवर जिलों में किसानों की जमीन बैंकों द्वारा नीलाम किए जाने के मामले सामने आए थे। हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तुरंत ही इस तरह की नीलामी रोकने के निर्देश दिए थे। कमर्शियल बैंकों से लिया हुआ किसानों का कर्ज अभी भी उनके लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ऐसे में बजट में सीएम गहलोत वन टाइम सैटलमेंट का फार्मूला ला सकते हैं। इसके तहत किसानों के कर्ज का 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करते हुए किसानों को कर्जमाफी की सौगात दे सकती है।
कृषि बजट में इन मुद्दों पर रह सकता है फोकस।
-कृषि प्रसंस्करण यूनिट शुरू करने और इनके संचालन को लेकर सरकारी अनुदान संभव,

- जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार कर सकती लुभावनी घोषणा,

- बीज, खाद और अन्य आदानों की किसानों को समय पर उपलब्धता के हो सकते उपाय,

- फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा,

- नई फसलों को इंट्रोड्यूस करने के लिए सरकार कर सकती घोषणा,

- संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्तर पर अनुदान की घोषणा संभव,

- सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र को बढ़ावा देना, जल संरक्षण को बढ़ावा देने के होंगे उपाय,

- पशुपालकों के लिए भैंस या अन्य दुधारू पशु खरीद के लिए ऋण देने की पेशकश,

- मत्स्य पालकों के लिए भी बजट में अलग से होंगे प्रावधान,

- ग्राम सेवा सहकारी समितियों के मार्फत ऋण उपलब्धता के सुलभ उपाय,

- दुग्ध उत्पादक समितियों के जरिए पशुपालकों के लिए लुभावनी घोषणा संभव,
पिछले तीन बजट में भी किसानों से जुड़े मुद्दों को सरकार ने दी प्राथमिकता।
मौजूदा गहलोत सरकार ने पिछले 3 बजट के दौरान भी किसानों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी है। सीएम गहलोत ने पिछली बार के बजट में भी किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थी। पिछली बार की गई घोषणाओं में से ज्यादातर पर कृषि विभाग तेजी से कार्य कर रहा है। आईए अब आपको बताते हैं कि पिछले बजट की घोषणाओं की क्या है प्रगति।
बजट घोषणाओं की प्रगति।
- किसानों को 16 हजार करोड़ के ब्याज मुक्त फसली ऋण की घोषणा पूरी हुई।

- विभिन्न स्थानों पर मंडियां शुरू, किसान ई-मंडी पोर्टल सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा।

- नई कृषि विद्युत वितरण कम्पनी बनाने की घोषणा पर खास प्रगति नहीं।

- कृषक उपहार योजना को संशोधित रूप से शुरू किया गया।

- पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार राज्य स्तरीय पशुपालक सम्मान समारोह हुआ,

- कृषि उपज मंडियों में 1000 करोड़ की घोषणा के मुकाबले 190 करोड़ राशि के कार्य हुए,

- प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर कृषि महाविद्यालयों की स्थापना कर शैक्षणिक सत्र शुरू,

- कृषि पर्यवेक्षक के 1507 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई,

- एक लाख किसानों को बायो फर्टिलाइजर, 1 लाख किसानों को मिनी किट वितरित,

- डेढ़ लाख किसानों को बीज मिनी किट वितरित,

- एकल कृषकों को जैविक खेती प्रमाणीकरण शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट मिलना शुरू हुआ,

- 6 संभागों में राजस्थान स्टेड सीड एंड ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी के उपकेन्द्र खोले गए,

- 33 हजार कम्पोस्ट यूनिट स्थापित की गई,

- 5 हजार फार्म पौण्ड, 4521 डिग्गियों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर निर्माण शुरू,

- अब तक 632 किसान सेवा केन्द्र सृजन का आदेश जारी।

सरकार ने किसानों के हित को देखते हुए कृषि विभाग में हाल ही मे की गई 3 नई नियुक्तियां।
किसानों के मामले को लेकर राज्य सरकार कितनी गंभीर है। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कृषि विभाग में हाल ही 3 नई नियुक्तियां की गई हैं। राज्य किसान आयोग, राज्य बीज निगम के रिक्त पदों को भरा गया है। साथ ही राजस्थान स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डवलपमेंट बोर्ड का नया गठन किया गया है। अब आपको बताते हैं कि कृषि बजट में किसानों की किस तरह की रह सकती हैं उम्मीदें।

किसानों की ये रहेंगी उम्मीदें।
- प्रत्येक ग्राम पंचायत में उपज रखने के लिए अत्याधुनिक गोदाम बनने चाहिए,

- किसानों को सभी तरह की उपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले,

- किसानों को टैक्स फ्री डीजल मिलना चाहिए,

- तालाब, नहर सिस्टम को दुरुस्त किया जाए, जिससे सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके,

- किसानों को बिजली पूरी तरह फ्री मिले, साथ ही सिंचाई के लिए बिजली दिन में मिले,

- दूध पर अनुदान 2 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 5 रुपए प्रति लीटर किया जाए,

- कृषि विश्वविद्यालयों के लिए बजट बढ़ाया जाना चाहिए ताकि कृषि में शोध को बढ़ावा मिले,

कृषि और पशुपालन सेक्टर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की धुरी।
प्रदेश सरसों, बाजरा और ग्वार के उत्पादन में अव्वल पायदान पर है। जबकि दलहन, तिलहन और दूध उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। कृषि और पशुपालन सेक्टर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की धुरी है। प्रदेश के करीब दो तिहाई आबादी इस क्षेत्र से ताल्लुक रखती है। ऐसे में इस बार अलग से आने वाले कृषि बजट से कृषि और पशुपालन क्षेत्र के लोगों की खास उम्मीदें रहेंगी। देखना होगा कि किसानों-पशुपालकों की इन उम्मीदों को सीएम गहलोत कितना पूरा कर सकेंगे।