उदयपुर से भगवान प्रजापत।
बसंत पंचमी का पर्व माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता हैं। शनिवार को शहर में बसंत पंचमी के मौके पर कई कार्यक्रम हुए। स्कूल और कॉलेजों में मां सरस्वती की पूजा अर्चना के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए तो शहर के प्रमुख जगदीश मंदिर में ठाकुरजी की प्रतिमा पर बांसती श्रृंगार किया गया।
इस मौके पर मंगला आरती के बाद केसरिया भात से भोग लगाया गया तो उसके बाद मंदिर मंडल की ओर से बांसती श्रृंगार कर भगवान जगदीश को अबीर-गुलाल लगाया गया। रंग पंचमी तक भगवान जगदीश को थोडा-थोडा अबीर गुलाल लगाया जाएगा और रंग पंचमी के दिन भगवान जगदीश होली खेलेगे। इससे पहले 40 दिनों तक लगातार मंदिर में चंग की थाप पर भजन कीर्तन होगें। कोरोना के चलते गत वर्ष किसी प्रकार के आयोजन नही हो पाए थे। लेकिन इस बार राज्य सरकार की ओर से पाबंदियो में छूट मिलने के बाद जगदीश मंदिर में भजन कीर्तन शुरू हुए हैं। इस मौके पर कई लोगों ने व्रत रखते हुए विद्या का दान भी किया। आपको बता दे कि बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती प्रकट हुई थी। यही कारण है कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। शिक्षा से जुड़े लोग और अन्य नई कलाओं को शुरू करने की इच्छा रखने वाले लोग बसंत पंचमी के दिन नया काम शुरू करते हैं।

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