जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट
राजस्थान प्रदेश में किसान कर्ज माफी और किसानों की जमीन नीलामी के मामले में सियासत तेज है। इसी बीच राजभवन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार के स्तर पर राजभवन में रोडा एक्ट संशोधन संबंधी कोई विधेयक नहीं आया और ना ही राज्यपाल कलराज मिश्र के स्तर पर इसे अनुमोदन के लिए भेजा गया।दरअसल पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किसानों की जमीन नीलामी से जुड़े राजनीतिक विवाद के बीच एक ट्वीट किया था। जिसमें लिखा था कि हमारी सरकार ने 5 एकड़ तक किसानों की जमीन नीलामी रोकने के लिए विधानसभा में रोडा एक्ट संशोधन विधेयक पास करके भेजा था। लेकिन राज्यपाल की स्तर पर उसका अनुमोदन नहीं होने के कारण राजस्थान में किसानों की जमीन नीलामी की स्थितियां बनी। इसी मामले में सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने राजभवन का घेराव का ऐलान कर विरोध प्रदर्शन भी किया और राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा था। अब राजभवन की ओर से यह स्पष्ट हो गया कि इस मामले को लेकर प्रदर्शन किया गया, उसका कोई आधार नहीं है। मतलब इस प्रकार का कोई भी विधेयक पिछले दिनों राज्य सरकार की ओर से राजभवन में नहीं भेजा गया है। राजभवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी गई। राज्यपाल के प्रमुख सचिव सुबीर कुमार ने बताया कि इस संबंध में सोमवार को ज्ञापन देने आए किसानों के प्रतिनिधिमंडल को भी इसकी जानकारी दे दी गई है।

यह था पूरा मामला।

राजस्थान प्रदेश में किसानों की जमीन की कर्ज नहीं चुकाने के चलते नीलामी हुई। भूमि नीलामी को लेकर प्रदेश में सियासत भी गरमाई। बीजेपी सीएम गहलोत को घेरने लगी। इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि किसानों की जमीन नीलामी के खिलाफ एक्ट लाया गया है। उसे केंद्र सरकार लागू नहीं कर रही है। अगर केंद्र सरकार उस बिल को लागू करे तो किसी एडीओ या तहसीलदार की हिम्मत नहीं की वह किसान की जमीन नीलाम कर दे। सीएम ने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी से आग्रह किया था कि प्रदेश की सरकार ने जो किसानों की 5 एकड़ तक की जमीन का कर्ज नहीं चुकाने पर भी जमीन नीलाम नहीं होने वाला संशोधन कानून विधानसभा में पास कर राज्यपाल के पास भेजा गया था। शायद राज्यपाल ने वो बिल दिल्ली सरकार को भेज दिया होगा। ऐसे में आप से आग्रह है कि आप केंद्र सरकार से इस मसले पर बात करें और इस बिल को लागू कराए। जिससे प्रदेश के किसी भी किसान की जमीन की नीलामी करने की हिम्मत कोई तहसीलदार या एसडीओ नहीं करें।