जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजधानी जयपुर की नगर निगम हैरिटेज ने डोर टू डोर कचरा संग्रहण कर रही बीवीजी कंपनी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। लेकिन ग्रेटर नगर निगम मामला कानून पेंच में फंसा होने की वजह से कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही है। हाईकोर्ट में तीन जनवरी को मामले की सुनवाई है। कोर्ट के आदेश के आधार पर ही ग्रेटर निगम कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाने की कार्रवाई करेगा। निलंबित महापौर सौम्या गुर्जर ने कंपनी को टर्मिनेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन कंपनी ने कोर्ट में जाकर स्टे ले लिया। जिसके बाद से ही ग्रेटर नगर निगम के हाथ बंध गए हैं। दूसरी तरफ तत्कालीन महापौर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम के बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधियों के पैसे लेनदेन का कथित वीडियो वायरल हो गया। यही नहीं बीवीजी मामले में ही आयुक्त के साथ बदतमीजी मामले में सौम्या गुर्जर को भी निलंबित कर दिया गया, जिसकी वजह से निगम प्रशासन चुप नजर आ रहा है। इस पूरे मामले में ग्रेटर नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। सौम्या गुर्जर ने जिस समय कंपनी को टर्मिनेट करने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए थे। उस समय अधिकारियों ने कार्रवाई में देरी कर दी और कंपनी को कोर्ट जाने का समय मिल गया। कार्यवाहक महापौर शील धाभाई सहित निगम का कोई भी पार्षद बीवीजी कंपनी के काम से खुश नहीं है। सभी का कहना है कि बीवीजी प्रतिनिधि किसी की नहीं सुनते। महापौर ने तो प्रतिनिधियों के साथ बैठक में साफ कहा था कि कंपनी प्रतिनिधियों को बुलाया जाए तो वो आते ही नहीं हैं। ऐसे में कंपनी का रवैया बर्दाश्त के बाहर है।