भगवान प्रजापत।

राजस्थान मे मंगलवार यानि आज से दीपावली के त्योहार पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो गई है। इस मौके पर राजस्थान के प्रत्येक इलाके के बाजारों को सजाया गया है और बाजारों को रोशनी से सराबोर कर दिया गया है। दरअसल कार्तिक मास में पंचपर्वा दीपावली का पहला पर्व धनतेरस या धन्वन्तरि त्रयोदशी आज मनाई जाएगी। त्रयोदशी तिथि आज दिन में 11.31 से लेकर बुधवार सुबह  09.02 तक रहेगी। इस दिन भौमप्रदोष होने से जमीन - जायदाद रियल स्टेट से जुड़े सौदे फायदेमंद रहेंगे। साथ ही सोने चांदी के आभूषण और नये बर्तन खरीदना भी शुभ फलदायक माना जाता है।  दिन में 11.31 तक तो त्रिपुष्कर नामक शुभयोग भी बन रहा है। मान्यता है कि त्रिपुष्कर योग में  होने वाला शुभकार्य तीन बार आवर्तन हो जाता है । इसलिए जो चल -अचल धन -संपत्ति, गहने आदि इस योग में खरीदे जाते हैं भविष्य में उनकी वृद्धि तय होती है। धनतेरस को पंचपर्वा दीपावली के मिट्टी के दीये खरीदना मंगलकार होता है। धनतेरस व्रत का संबंध यमराज से होता है। सायंकाल घर के मुख्य द्वार पर अन्न के दानों पर यमराज के निमित्त दक्षिणाभिमुख होकर दीपदान करने का विधान होता हैं। दीपक की गंध -पुष्पादि से पूजन कर दीपदान के समय यमराज को वन्दन -नमन करना चाहिए । पौराणिक कथा के अनुसार धनतेरस पर यमराज के लिए दीपदान करने से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।

धन तेरस को ही आयुर्विज्ञान के जनक भगवान् धन्वन्तरि की जयन्ती मनाई जाती है। कार्तिक कृष्णा त्रयोदशी को ही समुद्र मंथन के समय औषधियों का कलश लेकर भगवान् धन्वन्तरि का प्राकट्य हुआ था। संसार के प्राणियों को रोगमुक्त करने के लिए उनका अवतरण हुआ था इसलिए स्वास्थ्य लाभ की कामना से भक्तिपूर्वक भगवान् धन्वन्तरि का पूजन अर्चन करना चाहिए । इस दिन ओषधियों - वनस्पतियों के संरक्षण और संवर्धन का भी संकल्प लेना चाहिए जिन पर रोगोपचार निर्भर करता है।

धनतेरस का शुभ मुहूर्त।

सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नीरज शर्मा ने बताया कि भगवान धन्वन्तरि की पूजा के लिए सुबह 9.32 से  दोपहर 1. 42 तक समय श्रेष्ठ है। इस दौरान क्रमशः चर लाभ और अमृत का चौघड़िया रहेगा । अमृत का चौघडिया 12.19 से 1. 42 तक रहेगा । मध्याह्न 11.42 से 12 .26 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा ।  इसलिए अभिजीत और अमृत के चौघडिये में भगवान् धन्वन्तरि की पूजा अर्चना आरोग्य लाभ और स्वास्थ्य की निरन्तरता के लिए श्रेष्ठ रहेगा । उदयपुर में सूर्यास्त शाम 5.52 पर होगा । सूर्यास्त के बाद यमराज के निमित्त दीपदान करना चाहिए।